LOADING

Type to search

पिछली सरकार ने देर से बनाया आयोग; अनुदान वितरण प्रभावित, अब प्रक्रिया तेज

Local

पिछली सरकार ने देर से बनाया आयोग; अनुदान वितरण प्रभावित, अब प्रक्रिया तेज

Share

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी बोले,
निकायों को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस, राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार का दावा
चित्तौड़गढ़, 15 नवम्बर (विजन 360 न्यूज डेस्क):
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी शनिवार को चित्तौड़गढ़ दौरे पर रहे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में वर्तमान आयोग की कार्यप्रणाली, अनुदान वितरण और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। चतुर्वेदी ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा आयोग का गठन देर से किए जाने के कारण पंचायतों और नगर निकायों को मिलने वाले अनुदानों का वितरण समय पर नहीं हो सका। जबकि इस बार आयोग ने 1 अगस्त को गठन के बाद केवल एक महीने में—1 और 2 सितंबर को—अपनी पहली अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, जिससे प्रक्रिया में तेजी आई है।
उन्होंने बताया कि आयोग केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदानों के बंटवारे का आधार तैयार करता है। हाल ही में संभाग स्तर पर दो दिन की बैठकों में अधिकारियों व प्रतिनिधियों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि राजस्थान में पंचायती राज संस्थाएं और निकाय अभी भी सरकारी अनुदानों पर निर्भर हैं, जबकि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। भीलवाड़ा नगर परिषद का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां कचरे से बिजली व गैस बनाकर हर साल करीब 3 करोड़ रुपए की आय होती है। आयोग ऐसे सफल मॉडलों को पूरे राज्य में लागू करने की दिशा में प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि चुंगी व्यवस्था भैरों सिंह सरकार के समय समाप्त कर दी गई थी, जिसके बाद से निकायों को स्थाई अनुदान मिलता है। यह राशि अब वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय होती है। वर्तमान में गणनाएं 2011 की जनगणना पर आधारित हैं, लेकिन नई जनगणना आने पर अनुदानों में बढ़ोतरी संभव है। आयोग ने 7 प्रतिशत के आधार पर अनुदान देने की सिफारिश दोहराई है।
राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि दो साल पहले कांग्रेस सरकार से सत्ता संभालते समय राजस्थान घाटे में था, लेकिन वर्तमान सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार किया है। शहरी विकास कर को अधिक क्षेत्रों में लागू करने से जयपुर में 13–14 प्रतिशत तक आय बढ़ी है। उन्होंने ईआरसीपी और यमुना जल परियोजनाओं की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास कार्य बिना देरी के आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल सरकारी अनुदान से जनता की बढ़ती अपेक्षाएं पूरी नहीं हो सकतीं; निकायों की अपनी आय बढ़ाना समय की मांग है।

Tags:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *