LOADING

Type to search

ट्रंप सरकार का आरोप: H-1B वीज़ा का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी युवाओं का ‘अमेरिकन ड्रीम’ छीना

International

ट्रंप सरकार का आरोप: H-1B वीज़ा का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी युवाओं का ‘अमेरिकन ड्रीम’ छीना

Share

वॉशिंगटन डीसी, 31 अक्टूबर: ट्रंप सरकार के लेबर डिपार्टमेंट (श्रम विभाग) ने कंपनियों पर H-1B वीज़ा का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है। डिपार्टमेंट ने इस संबंध में एक वीडियो जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि कंपनियों ने कम सैलरी वाले विदेशी कर्मचारियों को अवैध तरीके से नौकरियाँ देकर अमेरिकी युवाओं का ‘अमेरिकन ड्रीम’ चुराया।
वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ये कंपनियाँ H-1B वीज़ा का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। इसमें उन राजनेताओं और नौकरशाहों को भी दोषी ठहराया गया है, जो इन कंपनियों को यह गड़बड़ी करने की अनुमति देते हैं। वीडियो के अनुसार, H-1B वीज़ा होल्डर्स का 72% हिस्सा भारतीयों का है, जबकि 12% चीनी नागरिक हैं।
नरेटर ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डेरमर के नेतृत्व में सरकार H-1B वीज़ा के गलत इस्तेमाल के लिए कंपनियों को जिम्मेदार ठहरा रही है और अमेरिकी लोगों के लिए ‘अमेरिकन ड्रीम’ वापस ला रही है।
प्रोजेक्ट फायरवॉल का ज़िक्र और सख्त निगरानी
वीडियो में ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ का ज़िक्र किया गया है, जिसका उद्देश्य H-1B वीज़ा पर सख्त निगरानी रखना है। इस 51 सेकंड के वीडियो में 1950 के दशक के खुशहाल अमेरिकी परिवारों और घरों की पुरानी क्लिप्स दिखाई गई हैं, जो अमेरिकन ड्रीम का प्रतीक हैं।
लेबर डिपार्टमेंट ने सितंबर 2025 में ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ शुरू किया था। इसका मकसद अमेरिकी कामगारों के अधिकार, वेतन और नौकरी के मौके बचाना है। प्रोजेक्ट के तहत, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे विदेशी कामगारों को नौकरी देने से पहले अमेरिकियों को प्राथमिकता दें। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनियों की जाँच होगी और गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी:
प्रभावित वर्कर्स को बकाया सैलरी देनी होगी।
सिविल पेनल्टी लगेगी।
दोषी कंपनियों को तय समय के लिए H-1B प्रोग्राम से बाहर कर दिया जाएगा।
H-1B वीज़ा फीस में भारी बढ़ोतरी
H-1B वीज़ा के दुरुपयोग पर सख्ती के बीच, अमेरिकी सरकार ने पिछले महीने इसकी फीस में भारी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। अब नए H-1B वीज़ा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपए) कर दी गई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि यह शुल्क वन टाइम होगा और एप्लीकेशन देते समय चुकाना होगा।
यह फीस 21 सितंबर 2025 से लागू हो गई है और इसका मुख्य मकसद विदेशी कामगारों पर कंपनियों की निर्भरता को कम करना है। यह नियम सिर्फ नए वीज़ा होल्डर्स पर लागू होगा, जबकि पुराने H-1B वीज़ा होल्डर्स पर इसका असर नहीं पड़ेगा। पहले H-1B वीज़ा पर 6 साल रहने का कुल खर्च 11 से 13 लाख रुपए के करीब बैठता था।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *