ट्रम्प ने परमाणु हथियार टेस्टिंग का दिया आदेश
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33 साल बाद अमेरिका फिर कर सकता है फुल न्यूक्लियर टेस्ट, चीन और रूस का दिया हवाला
वॉशिंगटन डीसी, 30 अक्टूबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेंटागन (रक्षा मंत्रालय) को तत्काल प्रभाव से परमाणु हथियारों की टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दिया है। ट्रम्प ने कहा कि यह परीक्षण चीन और रूस की क्षमताओं के बराबर होना चाहिए। ट्रम्प ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से ठीक एक घंटा पहले यह आदेश दिया।
33 साल पहले हुआ था आखिरी परीक्षण
अमेरिका ने आखिरी बार 23 सितंबर 1992 को ‘डिवाइडर’ कोडनेम से 1,030वां परमाणु परीक्षण किया था। यह नेवादा टेस्ट साइट पर रेनियर मेसा पहाड़ी के 2300 फीट नीचे भूमिगत किया गया था। उस विस्फोट से जमीन की चट्टानें पिघल गई थीं और सतह धंस गई थी। ट्रम्प का यह आदेश 1996 में हुए ‘कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी’ (CTBT) पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिस पर अमेरिका ने हस्ताक्षर तो किए हैं लेकिन औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं दी है।
ट्रम्प ने आदेश को ठहराया सही
ट्रम्प ने तीन दशक बाद फिर से परीक्षण शुरू करने के आदेश को सही ठहराते हुए कहा, “रूस और चीन दोनों ऐसा कर रहे हैं… मुझे लगता है कि हमें भी ऐसा करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास टेस्टिंग साइट्स हैं और इसकी घोषणा जल्द की जाएगी। उन्होंने परमाणु अप्रसार के सवाल पर कहा कि “मुझे लगता है हमने इसे काफी हद तक नियंत्रण में रखा है।”
रूस-चीन का जिक्र
ट्रम्प ने कहा कि रूस ने हाल ही में परमाणु मिसाइल सिस्टम का टेस्ट किया है (जो कि पूर्ण विस्फोटक परीक्षण से अलग होता है)। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का आदेश फिलहाल एक पूर्ण विस्फोटक परीक्षण का संकेत भर है, न कि निश्चित। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस के मुताबिक, राष्ट्रपति के आदेश के बावजूद परीक्षण शुरू करने में लगभग 24 से 36 महीने लग सकते हैं।
ट्रम्प के दावे के विपरीत, इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपंस के अनुसार, रूस के पास वर्तमान में (लगभग 5,500) परमाणु वॉरहेड के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं, जबकि अमेरिका (लगभग 5,044) दूसरे स्थान पर है।
