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कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व की घोषणा को दो साल, सफारी अब तक अधर में

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कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व की घोषणा को दो साल, सफारी अब तक अधर में

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फंड की भारी कमी से 35 गुना बड़ा कुंभलगढ़ पिछड़ा, बेहद छोटे झालाना-आमागढ़ को चार गुना फंड
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 20 नवम्बर:
राजस्थान के विशाल कुंभलगढ़-टॉडगढ़ रावली वन्यजीव क्षेत्र को 2023 में NTCA से टाइगर रिजर्व बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिले दो साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन कुंभलगढ़ में प्रस्तावित टाइगर सफारी अभी तक शुरू नहीं हो पाई। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बाघों के लिए सबसे उपयुक्त हैबिटैट मानते हैं, लेकिन फंड की कमी इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, बेहद छोटे आकार वाले झालाना और आमागढ़ अभयारण्यों को 154.1 मिलियन रुपये की ग्रांट मिल चुकी है, जबकि 35 गुना बड़े कुंभलगढ़-रावली-टॉडगढ़ क्षेत्र को केवल 41.5 मिलियन रुपये ही स्वीकृत हुए। टाइगर सफारी को शुरू करने के लिए इससे दस गुना अधिक फंडिंग की आवश्यकता है। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि यहां सिर्फ जंगल सफारी ही संचालित हो पा रही है।


देश में कुल 54 टाइगर रिजर्व हैं, जबकि राजस्थान में केवल पांच—रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली—सूचीबद्ध हैं। छठा रिजर्व कुंभलगढ़ को बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसका क्षेत्र उदयपुर, राजसमंद, पाली, ब्यावर और सिरोही जिलों में फैलेगा। विशेषज्ञ समिति द्वारा 596.20 वर्ग किमी को कोर और 800.86 वर्ग किमी को बफर घोषित किया गया है। WII देहरादून की 2023 की स्टडी में यहां सांभर की बड़ी आबादी की पुष्टि की गई थी, जो बाघों के लिए आदर्श शिकार आधार माना जाता है।
फंड की कमी से प्रमुख कार्य ठप
पेट्रोलिंग, वॉचटावर, शिकार आधार संरक्षण और वनोपन जैसी बुनियादी जरूरतें अधूरी पड़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बजट जल्द नहीं बढ़ाया गया, तो कुंभलगढ़ का टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट लंबी देरी का शिकार हो सकता है। क्षेत्रीय वन अधिकारी कमलेश कुमार रावत के अनुसार, योजना पर कार्य जारी है।
जंगल सफारी फिर शुरू
मानसून में क्षतिग्रस्त ट्रैक की मरम्मत के बाद कुंभलगढ़ में जंगल सफारी 8 अक्टूबर से पुनः प्रारंभ हुई है। लगभग 22 किलोमीटर की इस यात्रा में तेंदुआ, भालू, सांभर, नीलगाय, जंगली मुर्गे जैसे वन्यजीव देखे जा सकते हैं। जिप्सी शुल्क ₹2500 निर्धारित है।

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