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कालीबाई छात्रावास का सच: वार्डन परिवार का आतंक, बेटियां लौटी घर

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कालीबाई छात्रावास का सच: वार्डन परिवार का आतंक, बेटियां लौटी घर

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कलेक्टर को सौंपा चार पन्नों का शिकायत पत्र, शोषण और बदहाल व्यवस्थाओं के गंभीर आरोप

डूंगरपुर, 4 सितम्बर
सरकार करोड़ों खर्च कर जनजाति क्षेत्रों में बालक-बालिकाओं के लिए छात्रावास चलाती है ताकि गरीब बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित माहौल मिल सके। मगर डूंगरपुर जिले की दोवड़ा पंचायत समिति मुख्यालय स्थित वीरबाला कालीबाई जनजाति बालिका छात्रावास की हकीकत कुछ और ही निकली।
गुरुवार को यहां की छात्राओं ने जिला कलेक्टर अंकितकुमार सिंह को चार पन्नों का हस्तलिखित शिकायत पत्र सौंपा। इसमें वार्डन बसंतीदेवी अहारी और उसके परिवार पर शोषण, मारपीट और धमकी के आरोप लगाए। छात्राओं का कहना है कि वार्डन की बेटी युवक्ति अहारी आए दिन मारपीट करती है, जबकि बेटा सुन्नी अहारी लोहे का पाइप लेकर डराता है और कई बार आधे कपड़ों में धमकी देता है।
खराब भोजन और सुविधाओं की कमी
छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में खाने-पीने की स्थिति बेहद खराब है। सब्जी पानी जैसी परोसी जाती है और 86 छात्राओं के लिए महज 6 लीटर दूध आता है। फल के नाम पर सप्ताह में सिर्फ तीन बार केला मिलता है। एक छात्रा ने कहा—“भूख लगने पर मैडम कहती हैं खाना मुफ्त नहीं आया, मैं जेब से खिला रही हूं।” नहाने और कपड़े धोने का साबुन भी महीने में सिर्फ एक बार दिया जाता है।
विरोध पर धमकी, छात्राएं लौटीं घर
छात्राओं का आरोप है कि विरोध करने पर हॉस्टल से निकाल देने की धमकी दी जाती है। इससे तंग आकर छात्राएं अपनी टीसी की मांग कर हॉस्टल छोड़ घर लौट गईं। इस घटना से जिलेभर में हड़कंप मच गया है। जनजाति विभाग के उपायुक्त सत्य प्रकाश कच्छवाहा ने कहा कि शिकायत की जांच करवाई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी। अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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