चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर 250 साल पुरानी गणेश- कुबेर मूर्तियां
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दुर्लभ जोड़ी और परंपरा आज भी जीवित
चित्तौड़गढ़। 27 अगस्त
चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर एक ऐसा मकान है, जहां भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की मूर्तियां एक साथ विराजमान हैं। यह दृश्य अत्यंत दुर्लभ है क्योंकि आमतौर पर गणेश जी को उनकी पत्नियों रिद्धि और सिद्धि के साथ पूजा जाता है। इन मूर्तियों की ऊंचाई लगभग डेढ़ से दो फीट है और यह परंपरा लगभग 250 वर्षों से परिवार में चली आ रही है।
स्थानीय निवासी सतीश सुखवाल ने बताया कि मूर्तियां पहले कच्चे मकान में स्थापित थीं और अब भी उसी स्थान पर सुरक्षित हैं। हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष पूजा, श्रृंगार, भोग अर्पित किया जाता है और भजन-कीर्तन होता है।
भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान और सफलता का प्रतीक हैं, जबकि कुबेर धन, वैभव और समृद्धि के देवता माने जाते हैं। इन दोनों का साथ होना जीवन में सफलता और समृद्धि के संतुलन का प्रतीक है। यह दुर्लभ संगम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया है और पर्यटक तथा भक्त इसे देखने के लिए आते हैं।
