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बंदर की मौत पर रोया गांव, मुंडन-पगड़ी और पिंडदान की रस्में भी निभीं

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बंदर की मौत पर रोया गांव, मुंडन-पगड़ी और पिंडदान की रस्में भी निभीं

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उदयपुर, 10 सितम्बर
चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर क्षेत्र के धीरजी का खेड़ा गांव में एक बंदर की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। ग्रामीणों का मानना है कि यह बंदर हनुमानजी का स्वरूप था। उसकी अंतिम यात्रा इंसान की तरह निकाली गई और वैदिक विधि-विधान के साथ उसका संस्कार किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार बंदर पिछले दो वर्षों से गांव के खाकल देवजी मंदिर में रहता था। उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और हमेशा शांति से मंदिर परिसर में ही रहता था। रविवार, 7 सितम्बर को श्राद्ध पक्ष के पहले दिन उसकी मृत्यु हुई तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
गांववालों ने निर्णय लिया कि बंदर का अंतिम संस्कार इंसानों की तरह किया जाएगा। ढोल-ताशों के बीच उसकी अर्थी उठाई गई और लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। कई ग्रामीण आंखों में आंसू लिए उसके सामने हाथ जोड़कर खड़े रहे। अंतिम यात्रा में बंदर को मंदिर के सामने ले जाया गया, जहां वह रोज बैठा करता था। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उसका अंतिम संस्कार किया गया।
गांव के 11 हनुमान भक्तों ने अपने सिर का मुंडन कराया और पिंडदान किया। यह वही विधि है जो किसी इंसान की मृत्यु पर हिंदू परंपरा में की जाती है। अगले दिन, 8 सितम्बर को उसकी अस्थियों का विसर्जन मातृकुंडिया में किया गया। बाद में गांव में पगड़ी की रस्म निभाई गई और लगभग 900 लोगों के लिए भंडारे का आयोजन हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि यह बंदर साधारण नहीं था। वह मंदिर की आरती और पूजा में शामिल होता था। कई बार श्रद्धालुओं की गोद में बैठ जाता, बच्चों के साथ खेलता और बुजुर्गों के पास शांत भाव से बैठ जाता। उसका सरल और दोस्ताना व्यवहार ही उसे पूरे गांव का प्रिय बना गया था। उसकी मौत से ग्रामीणों को ऐसा लगा जैसे परिवार का कोई सदस्य चला गया हो।

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