भागवत बोले- संघ जितना विरोध किसी संगठन का नहीं हुआ
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टैरिफ विवाद के बीच कहा- अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं होगा
नई दिल्ली। 26 अगस्त
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहा कि जितना विरोध RSS का हुआ है, उतना किसी संगठन का नहीं हुआ। इसके बावजूद स्वयंसेवकों के मन में समाज के प्रति सात्विक प्रेम ही है, जिससे विरोध की धार भी कम हुई है।
भागवत ने कहा कि आत्मनिर्भरता जरूरी है, लेकिन स्वदेशी का मतलब विदेशों से संबंध तोड़ना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार चलता रहेगा, पर किसी दबाव में नहीं।
हिंदुत्व की परिभाषा : भारत का लक्ष्य विश्व कल्याण है। हिंदुत्व का आधार सत्य और प्रेम है।
संघ प्रमुख के संबोधन की अहम बातें
धर्म और कन्वर्जन : धर्म का मतलब कन्वर्जन नहीं है। धर्म सत्य तत्व है, जिसके आधार पर सब चलता है।
आर्थिक उन्नति पर चेतावनी : आर्थिक प्रगति से पर्यावरण पर नाशक असर और अमीर-गरीब की खाई बढ़ रही है।
भारत की अच्छाई : समाज में जितनी बुराई है, उससे 40 गुना अच्छाई ज्यादा है। केवल मीडिया रिपोर्टों से भारत का आकलन गलत होगा।
हिंदू-इस्लाम संबंध : दोनों धर्मों के बीच दूरी कम करने के लिए दोनों ओर से प्रयास जरूरी।
संविधान पालन की अपील : उकसावे की स्थिति में भी कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।
भारत का महत्व : दुनिया के लिए भारत जरूरी है क्योंकि धर्म देने वाला देश दूसरा कोई नहीं है।
भागवत ने कहा कि संघ में कोई प्रोत्साहन या इनाम नहीं मिलता। स्वयंसेवक समाज की निस्वार्थ सेवा से जो सार्थकता और आनंद पाते हैं, वही उनकी असली प्रेरणा है।
