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‘मराठा राजस्थान में शासन करने नहीं, चौथ वसूली और लूटपाट के लिए आए’

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‘मराठा राजस्थान में शासन करने नहीं, चौथ वसूली और लूटपाट के लिए आए’

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-मेवाड़ क्षत्रिय महासभा संस्थान ने भी एनसीईआरटी के तथ्यों पर उठाया सवाल
-8वीं की पुस्तक में रियासती राजस्थान को मराठा साम्राज्य में बताने का मामला

उदयपुर। 11 अगस्त
मेवाड़ क्षत्रिय महासभा संस्थान ने एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में प्रकाशित नक्शे पर कड़ा विरोध जताया है, जिसमें संपूर्ण रियासती राजस्थान को मराठा साम्राज्य का हिस्सा बताया गया है। संस्थान के अध्यक्ष अशोक सिंह मेतवाला और पूर्व अध्यक्ष रणधीर सिंह भींडर ने सोमवार को प्रेसवार्ता में कहा कि मराठा राजस्थान में केवल चौथ वसूली और लूटपाट के लिए आए, शासन करने के लिए नहीं। उन्हें सम्राट घोषित करना इतिहास के साथ अन्याय है।
उन्होंने बताया कि इस विषय पर राजसमंद सांसद व पूर्व मेवाड़ राजपरिवार की सदस्य महिमा कुमारी तथा नाथद्वारा विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़ ने केंद्र तक आपत्ति दर्ज कराई है। संस्थान का प्रतिनिधिमंडल भी जल्द मुख्यमंत्री से मिलेगा और सुधार नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई करेगा।
मेतवाला ने आरोप लगाया कि एनसीईआरटी में विदेशी और वामपंथी विचारधारा के लोग हैं, जिन्हें देश का गौरवशाली इतिहास नहीं पता। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मराठा-मेवाड़ संबंध सीमित रूप से पारिवारिक थे, जैसे छत्रपति साहू का दत्तक पुत्र के लिए मेवाड़ के राजकुमार की मांग, और बाजीराव पेशवा को महाराणा जगतसिंह द्वितीय द्वारा बराबर गद्दी पर बिठाना।
उन्होंने कहा कि मारवाड़, हाड़ौती और शेखावाटी में मराठों ने कोई स्थायी वसूली नहीं की। शिप्रा की लड़ाई में महाराणा अमर सिंह की सेना में शामिल आठ हजार सैनिकों को बीस लाख रुपए का भुगतान किया गया था। जो दर्शाता है कि मराठा यहां केवल लूटपाट और आक्रमण के इरादे से आते थे, शासन के लिए नहीं। प्रेसवार्ता में महामंत्री भवानी सिंह ताना और पूर्व उप महापौर महेंद्र सिंह शेखावत भी उपस्थित रहे।

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