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माही बांध से जालौर-बाड़मेर तक पानी ले जाने की योजना पर संकट

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माही बांध से जालौर-बाड़मेर तक पानी ले जाने की योजना पर संकट

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गुजरात की सहमति के बिना असंभव, बांसवाड़ा में युवक कांग्रेस का जल सत्याग्रह

उदयपुर। 7 अगस्त
राजस्थान सरकार की ओर से जालौर, पाली, सिरोही और बाड़मेर की पेयजल समस्या समाधान के लिए माही बांध को जवाई बांध से जोड़ने की योजना पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सरकार ने इसके लिए 15.60 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार करने को मंजूरी दे दी है, लेकिन गुजरात की सहमति के बिना यह परियोजना आगे बढ़ना मुश्किल है।
गुजरात को होगा नुकसान, बढ़ेगा जल विवाद
माही बांध का निर्माण गुजरात के सहयोग से हुआ था और दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते के अनुसार 77 टीएमसी की कुल भराव क्षमता में से 40 टीएमसी पानी पर गुजरात का हक है। ऐसे में यदि माही का पानी रोककर राजस्थान में ही उपयोग किया गया तो गुजरात का कडाना बांध प्रभावित होगा, जिससे वह आपत्ति जता सकता है। जल संसाधन विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता दीपक दोसी के अनुसार, बिना गुजरात की अनुमति के केंद्रीय जल आयोग भी इस परियोजना को मंजूरी नहीं देगा और इससे अंतरराज्यीय जल विवाद बढ़ सकता है।
पहले भी बन चुकी है अटकी डीपीआर
इससे पहले मानसी-वाकल परियोजना के तहत भी जवाई बांध के लिए डीपीआर बनाई गई थी, लेकिन गुजरात की सहमति नहीं मिलने के कारण वह पिछले कई वर्षों से केंद्र सरकार में लंबित है। ऐसी ही स्थिति माही से जवाई बांध की डीपीआर के साथ भी हो सकती है।
माही के पानी को लेकर बांसवाड़ा में विरोध
इस बीच माही बांध से पानी बांसवाड़ा और डूंगरपुर के दानपुर, आंबापुरा जैसे दूरस्थ इलाकों तक नहीं पहुंचने के चलते स्थानीय लोग नाराज हैं। गुरुवार को युवक कांग्रेस ने माही बैकवाटर में जल सत्याग्रह किया। प्रदेश महासचिव सुभाष निनामा ने कहा कि माही का पानी पहले वागड़ क्षेत्र को मिले, क्योंकि माही बांध स्थानीय किसानों की जमीन पर बना है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे अरविंद डामोर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनता की आवाज नहीं सुनी तो बड़ा आंदोलन होगा।

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