विद्यालयों में तनाव और अपराध रोकने के लिए अध्यापकों को निभानी होगी सेतु की भूमिका – डॉ. प्रदीप कुमावत
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उदयपुर। 25 अगस्त
देशभर के विद्यालयों में हाल के दिनों में छात्रों के बीच बढ़ते अपराध, गोलीबारी और चाकूबाजी जैसी घटनाओं ने समाज को गहरी चिंता में डाल दिया है। इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में अध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच बढ़ती दूरी को मुख्य कारण मानते हुए, प्रख्यात शिक्षा चिंतक डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि अब समय आ गया है जब अध्यापकों को अपनी भूमिका को पुनः आत्मसात करना होगा। उक्त विचार डॉ प्रदीप कुमावत ने ऋषभदेव के सामुदायिक भवन में ब्लॉक स्तरीय वाकपीठ में 250 से अधिक प्राचार्यों को संबोधित करते हुए कहे।
डॉ. कुमावत ने कहा कि “जब तक छात्रों की समस्याओं को उनके पारिवारिक संदर्भों से जोड़कर नहीं समझा जाएगा और अभिभावकों से प्रत्यक्ष संवाद कायम नहीं होगा तब तक समाधान संभव नहीं है। अध्यापक को घर और विद्यालय के बीच सेतु की भूमिका निभानी होगी। विद्यार्थी विद्यालय से घर और घर से विद्यालय संस्कार लेकर आता है। इस बीच अध्यापक ही वह सूत्रधार है जो दोनों ध्रुवों को जोड़ सकता है।”
उन्होंने कहा कि आज की परिस्थितियों में संवाद की कमी सबसे बड़ी समस्या है। कक्षा में औपचारिक शिक्षा देने के साथ-साथ छात्रों से अनौपचारिक स्तर पर भी जुड़ना आवश्यक है। स्मार्टफोन ने छात्रों में आक्रामकता बढ़ाई है ऐसे में केवल ज्ञान देना पर्याप्त नहीं, बल्कि विवेक और प्रज्ञा का विकास करना अनिवार्य है।
डॉ. कुमावत ने इस अवसर पर तनाव मुक्ति के व्यावहारिक प्रयोग भी कराए। उन्होंने हास्य और मुस्कान के 20 प्रयोग करके बताया कि “जिस कक्षा की शुरुआत मुस्कान से होगी, उसमें कभी तनाव नहीं पनपेगा। यदि शिक्षक प्रश्नों को हँसी-खुशी के वातावरण में पूछें और जिज्ञासाओं के उत्तर आनंदपूर्वक दें, तो छात्र तनाव मुक्त होकर सीखने में रुचि लेंगे।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संवाद का यह अभाव दूर नहीं किया गया तो विद्यालयों में तनाव और अपराध की घटनाएँ और भी विस्फोटक रूप ले सकती हैं। अंत में उन्होंने सभी प्राचार्यों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने विद्यालयों में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच विश्वास और आत्मीयता की संस्कृति स्थापित करें।
इस अवसर पर आलोक संस्थान सेक्टर 11 के चितमथ सभागार में भी डॉ प्रदीप कुमावत के मुख्य आतिथ्य और मुख्य व्यक्ता के रूप में विद्यालय में तनाव मुक्त वातावण निर्माण पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें आलोक संस्थान के 200 अध्यापक अध्यापिकाओं ने भाग लिया।
