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समाज अलग, श्मशान भी अलग, पर गांव ने दोनों दोस्तों को साथ किया विदा

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समाज अलग, श्मशान भी अलग, पर गांव ने दोनों दोस्तों को साथ किया विदा

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-मियाला में दो दोस्तों का एक ही चिता पर संस्कार
-सामाजिक समरसता का पेश किया उदाहरण
-अंतिम संस्कार में भर आईं सभी की आंखें

उदयपुर: 10 अगस्त
लोकदेवता बाबा रामदेवजी की पावन नगरी मियाला ने ऐसी मिसाल पेश की, जो समाज में मानवता और भाईचारे की अनूठी पहचान बन गई। रक्षा बंधन के दिन (9 अगस्त) को मियाला गांव के दो जिगरी दोस्त विशाल लाल पुत्र किशन लाल भांड और श्रवण सिंह पुत्र लाडू सिंह की रामदेव सागर में डूबने से आकस्मिक मौत हो गई थी।
दोनों अलग-अलग समाज वर्ग से थे और उनके श्मशान घाट भी अलग थे। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मतभेद और सामाजिक दीवारें देखने को मिलती हैं, लेकिन इस बार मियाला के रावत समाज ने सभी भेदभाव तोड़कर इंसानियत को सर्वोपरि रखा। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि दोनों दोस्तों का अंतिम संस्कार एक साथ, रावत समाज के श्मशान घाट पर किया जाएगा।
गमगीन माहौल में निकली दोनों की संयुक्त अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची, जहां एक ही चिता पर दोनों का संस्कार हुआ। गांव का यह निर्णय सामाजिक समरसता का बेजोड़ उदाहरण बना है। इसकी चर्चा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में है।

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