सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब पीड़ित भी कर सकेंगे अपील
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नई दिल्ली। 25 अगस्त
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आपराधिक मामलों में पीड़ित और उनके उत्तराधिकारियों को भी ऊंची अदालत में अपील का अधिकार दे दिया है। अब तक केवल दोषी और राज्य सरकार को ही आदेश के खिलाफ अपील का अधिकार प्राप्त था। अदालत ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में पीड़ित की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी दोषी की।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और केवी विश्वनाथन की पीठ ने सीआरपीसी की धारा 372 का हवाला देते हुए कहा कि यदि पीड़ित सजा की अवधि, मुआवजे या आरोपी को बरी करने के आदेश से असंतुष्ट है, तो वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि दोषी की तरह पीड़ित को भी सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध पीड़ित की मृत्यु की स्थिति में उसका उत्तराधिकारी अपील को आगे बढ़ा सकेगा। यह प्रावधान न्याय सुनिश्चित करने और पीड़ित पक्ष की संतुष्टि के लिए आवश्यक है।
गौरतलब है कि अब तक आपराधिक मामलों में अपील का अधिकार केवल दोषी व्यक्ति (सीआरपीसी धारा 374 के तहत) और राज्य सरकार को ही प्राप्त था। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद दोषी और पीड़ित दोनों को समान कानूनी अधिकार मिल गए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारतीय न्याय प्रणाली में एक बड़ा सुधार है, जिससे पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में मजबूती मिलेगी। अदालत ने इस फैसले को “न्याय के संतुलन” की दिशा में अहम कदम बताया।
