इतिहासप्रेमियों ने लिया प्रण, अब कागज-कलम के जरिये होगा ‘हल्दीघाटी का रण’
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-मेवाड़ के इतिहास के त्रुटियों को सुधारने NCERT को पत्र अभियान आरंभ
-एक तरफ इतिहासविदों ने लिखे पत्र, दूसरी तरफ शोधार्थी-विद्यार्थी भी उतरे मैदान में
उदयपुर। 11 अगस्त
स्कूलों में पढ़ाई जा रही एनसीईआरटी तथा एनसीईआरटी अप्रूव्ड पुस्तकों में मेवाड़ के इतिहास की त्रुटियों पर ध्यानाकर्षण और उनको विलोपित कर सही तथ्यों को लिखने के लिए मेवाड़ के इतिहासविदों सहित इतिहासप्रेमियों ने अब कागज-कलम को हथियार बनाया है। सोमवार से एनसीईआरटी को पत्र लिखने का अभियान शुरू कर दिया गया। एक तरफ मेवाड़ इतिहास परिषद, उदयपुर हिस्ट्री फोरम की तरफ से वरिष्ठ इतिहासविदों ने कलम उठाई तो दूसरी तरफ इतिहास संकलन समिति के चित्तौड़ प्रांत के युवा आयाम के बैनर तले शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने खत लिखे। सभी ने कहा कि अब कागज-कलम के जरिये ‘हल्दीघाटी का रण’ होगा।
ग्लोबल हिस्ट्री फोरम के संस्थापक महासचिव डॉ. अजातशत्रु सिंह शिवरती ने बताया कि फोरम के संस्थापक अध्यक्ष एवं वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. जी. एल. मेनारिया तथा मेवाड़ इतिहास परिषद के अध्यक्ष प्रो. जे.के. ओझा के नेतृत्व में इतिहासविद डॉ. प्रियदर्शी, डॉ. मीनाक्षी व डॉ. राम सिंह राठौड़ ने प्रधानमंत्री मोदी, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, एनसीईआरटी चेयरमैन एवं अन्य सम्बंधित उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे। उन्होंने बताया कि पत्र अभियान जारी रहेगा और तथ्यों के संदर्भ भी संलग्न किए जाएंगे।
इधर, इतिहास संकलन समिति चित्तौड़ प्रांत के मंत्री असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीष श्रीमाली ने बताया कि हाल ही में कक्षा सात की एनसीईआरटी द्वारा अप्रूव्ड गोयल ब्रदर्स प्रकाशन की पुस्तक में हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की हार बताने का मामला सामने आया है। इसी तरह, एनसीईआरटी की आठवीं की पुस्तक में “मराठा साम्राज्य”शीर्षक के मानचित्र में मेवाड़ सहित सभी तत्कालीन राजपूत रियासतों को मराठा साम्राज्य के अधीन एक प्रशासनिक इकाई दर्शाया गया है। यह दोनों ही तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और इससे इतिहासप्रेमियों में रोष व्याप्त है।
इन त्रुटियों के तथ्यात्मक शुद्धीकरण को लेकर इतिहास संकलन समिति के चित्तौड़ प्रांत के युवा आयाम प्रमुख डॉ. प्रताप दान के नेतृत्व में सोमवार को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, एनसीईआरटी व अन्य संबंधित जिम्मेदारों को पत्र लिखे गए। इसमें लिखा गया कि जब नवीन शोध में भी यह प्रमाणित हो चुका है कि हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय हुई है तो पुस्तकों में सुधार किया जाना चाहिए। प्रताप दान ने बताया कि इस अभियान को स्कूली छात्रों तक भी लेजाया जाएगा।
