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होटल कारोबारी को सरकारी भूमि आवंटित करने की तैयारी से बवाल

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होटल कारोबारी को सरकारी भूमि आवंटित करने की तैयारी से बवाल

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सुरपुर मोड़ पर करोड़ों की जमीन होटल व्यवसायी को देने की कवायद, ग्रामीणों का विरोध तेज

डूंगरपुर। 25 अगस्त
डूंगरपुर शहर के पास सुरपुर ग्राम पंचायत की बेशकीमती सरकारी जमीन को होटल कारोबारी को देने की तैयारी से हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस पर गहरा आक्रोश जताया है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
पंचायत ने किया था प्रस्ताव खारिज, फिर भी जारी प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ग्राम पंचायत खाते की इस करोड़ों की जमीन को होटल व्यवसायी बाबूसिंह राजपुरोहित को आबंटित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। जबकि सुरपुर पंचायत पहले ही इस प्रस्ताव को खारिज कर चुकी थी। बावजूद इसके, अधिकारियों ने उद्योग लगाने का हवाला देकर एमओयू का सहारा लिया और जमीन देने की कवायद आगे बढ़ा दी।
होटल व्यापारी को क्यों मिली तरजीह?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों के लिए वर्षों से जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही, वहीं होटल व्यापारी को महज कुछ महीनों में प्राइम लोकेशन पर जमीन देने की तैयारी कर ली गई।
बाबूसिंह राजपुरोहित, जो जोधपुर मिष्ठान भंडार के संचालक हैं, पहले भी सीमलवाड़ा मार्ग पर डीएलसी दर पर जमीन लेकर होटल बना चुके हैं और बाद में उसे करोड़ों में बेचकर मुनाफा कमा चुके हैं। उस समय भी स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने का दावा किया गया था, लेकिन होटल में आज तक बाहरी स्टाफ ही काम कर रहा है।
सरकारी दफ्तरों को नहीं मिल रही जमीन
जिला प्रशासन बीते पांच सालों से न्यायालय और सरकारी कार्यालयों के लिए जमीन की तलाश कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। मजबूरी में कई विभागों को दूरस्थ इलाकों में भवन निर्माण करना पड़ा। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकारी जरूरतें पूरी नहीं हो सकीं, तो निजी व्यापारी को इतनी आसानी से जमीन क्यों दी जा रही है।
आंदोलन की राह पर ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की सांठगांठ है। राजपुरोहित के दोनों प्रमुख दलों—भाजपा और कांग्रेस—के नेताओं से अच्छे संबंध बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि पिछले एक दशक से वे ठेकों और भूमि आवंटन में लाभ उठाते रहे हैं। सुरपुर पंचायत की इस भूमि को लेकर अब ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। कई सामाजिक संगठनों व एनजीओ ने प्रशासन पर दबाव बनाया है। यदि जमीन आवंटन रद्द नहीं हुआ, तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। इस मामले पर जिला कलेक्टर अंकित सिंह ने कहा कि वह अवकाश पर थे। ग्रामीणों की आपत्ति सामने आई है, मामले की जांच कर आगे कार्रवाई की जाएगी।

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