जैसलमेर की धरती पर 20 करोड़ साल पुराना राज़ उजागर
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मिला दुर्लभ फाइटोसॉरस का जीवाश्म
डिजीटल डेस्क, उदयपुर । 25 अगस्त
राजस्थान के जैसलमेर जिले के मेघा गांव में वैज्ञानिकों को 20 करोड़ साल पुराना दुर्लभ जीवाश्म मिला है। जोधपुर स्थित जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संकाय के डीन प्रो. वी.एस. परिहार की टीम ने इस खोज को अंजाम दिया। यह जीवाश्म फाइटोसॉरस (Phytosaur) का है, जो आकार और बनावट में मगरमच्छ जैसा दिखता था।
वैज्ञानिकों के अनुसार मिले जीवाश्म का कंकाल 1.5 से 2 मीटर लंबा है। खास बात यह है कि इसके पास एक अंडा भी मिला है, जो इस प्राचीन जीव की प्रजनन प्रक्रिया को समझने में मदद करेगा। फाइटोसॉरस नदी और जंगलों के पास रहते थे और मुख्य रूप से मछलियां खाते थे।
प्रो. परिहार का कहना है कि भारत में यह पहली बार और दुनिया में दूसरी बार ऐसा जीवाश्म मिला है। यह खोज 21 अगस्त को जैसलमेर की लाठी फॉर्मेशन नामक चट्टानों में हुई है, जो जुरासिक काल की मानी जाती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि फाइटोसॉरस पर्मियन-ट्राइसिक काल की बड़ी तबाही से भी बच गए थे और जुरासिक युग तक जीवित रहे।
मेघा गांव की यह पहाड़ी करीब 20 किलोमीटर तक फैली हुई है और अकाल वुड फॉसिल पार्क से जुड़ी है। जीवाश्म की खोज के बाद प्रशासन ने क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए तारबंदी कर दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी यहां जीवाश्म मिले थे, जिनसे अनुमान लगाया गया था कि कभी इस क्षेत्र में 8 से 10 फीट लंबे उड़ने वाले शाकाहारी डायनासोर भी रहते होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भारत की भूवैज्ञानिक पहचान को नई ऊंचाई देगी और जैसलमेर आने वाले समय में देश की भूवैज्ञानिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
