भारतीय इकोनॉमी 7.8% से बढ़ी: सर्विस और एग्रीकल्चर सेक्टर से मिला बूस्ट
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मुंबई | 29 अगस्त
भारत की इकोनॉमी ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दमदार प्रदर्शन किया है। इस अवधि में GDP ग्रोथ 6.5% से बढ़कर 7.8% पर पहुंची, जो पिछली 5 तिमाहियों में सबसे अधिक है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन ने इस ग्रोथ को मजबूती दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को “डेड” कहा था। लेकिन ताजा आंकड़े इस दावे के विपरीत भारत की आर्थिक मजबूती को दिखाते हैं।
जीडीपी ग्रोथ के 5 बड़े कारण
सर्विस सेक्टर बूम – व्यापार, होटल, परिवहन और वित्तीय सेवाओं सहित इस सेक्टर में 9.3% की वृद्धि।
मैन्युफैक्चरिंग व कंस्ट्रक्शन – 7.5% से अधिक की ग्रोथ से अर्थव्यवस्था को सहारा।
खपत में तेजी – निजी उपभोग खर्च 7% बढ़ा, जबकि सरकारी खर्च 9.7% उछला।
निवेश में बढ़ोतरी – ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 7.8% बढ़ा।
कृषि सेक्टर में सुधार – पिछले साल की 1.5% ग्रोथ दर अब 3.7% पर पहुंची।
RBI का अनुमान और आगे की उम्मीदें
रिजर्व बैंक ने 6 अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में FY26 के लिए 6.5% ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा था। RBI गवर्नर के अनुसार, बेहतर मानसून और त्योहार सीजन से अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त बढ़ावा मिलेगा।
GDP क्या है और कैसे कैलकुलेट होती है?
GDP (Gross Domestic Product) किसी तय समय में देश के भीतर उत्पादित सभी गुड्स और सर्विस की कुल वैल्यू को मापती है। इसमें विदेशी कंपनियों का घरेलू उत्पादन भी शामिल होता है।
रियल GDP – बेस ईयर की कीमतों पर आधारित (फिलहाल 2011-12)।
नॉमिनल GDP – वर्तमान कीमतों पर आधारित।
फॉर्मूला:
GDP = C + G + I + NX
C = प्राइवेट कंजम्प्शन
G = गवर्नमेंट स्पेंडिंग
I = इन्वेस्टमेंट
NX = नेट एक्सपोर्ट (एक्सपोर्ट – इम्पोर्ट)
GDP पर असर डालने वाले चार इंजन
आम जनता का खर्च
प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ (32% योगदान)
सरकारी खर्च (11% योगदान)
नेट डिमांड (भारत में इम्पोर्ट ज्यादा, इसलिए इसका असर नकारात्मक)
