राजस्थान में 8 माह में पुलिस हिरासत में 11 मौतें
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उदयपुर संभाग में सर्वाधिक 7 मौतें, आरटीआई पर फुटेज नहीं देती पुलिस
उदयपुर, 31 अगस्त
राजस्थान में इस साल करीब आठ महीने में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं। इनमें से सात मौतें उदयपुर संभाग में दर्ज की गईं। हाल ही अगस्त में दो सर्राफा व्यापारियों—राजसमंद जिले के कांकरोली थाने में भीलवाड़ा निवासी खूबचंद सोनी और उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाने में डूंगरपुर निवासी सुरेश पांचाल—की मौतों से बवाल मच गया था। दोनों मामलों में आरोप चोरी के जेवर खरीदने से जुड़े थे।
पीड़ित परिवारों और आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस हिरासत में मौत के मामलों में वास्तविक दोषियों को सजा नहीं मिलती। अधिकतर मामलों में औपचारिकता पूरी करने के लिए मुआवजा और कुछ पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया जाता है। आरटीआई से सीसीटीवी फुटेज मांगे जाने पर थानाधिकारी अक्सर कैमरे खराब, हार्ड डिस्क फुल या गोपनीयता भंग होने जैसे गैरजिम्मेदाराना जवाब देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
सुप्रीम कोर्ट व सूचना आयोग के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के परमवीर सैनी बनाम बलजीत प्रकरण में आदेश दिया था कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और कम से कम 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखी जाए। हिरासत में मौत या क्रूरता के मामलों में फुटेज उपलब्ध कराना आवश्यक है।
सूचना आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि सीसीटीवी का उद्देश्य गोपनीयता नहीं, बल्कि पारदर्शिता और निष्पक्षता है। उदयपुर के कई मामलों में आयोग ने पुलिस को फुटेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
उदयपुर रेंज आईजी गौरव श्रीवास्तव का कहना है कि हाल ही की दोनों मौतों में सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पक्ष में रहे और अदालत में सभी सबूत पेश करना अनिवार्य है। यदि किसी अधिकारी ने आरटीआई में फुटेज देने से इनकार किया है तो अपील की जा सकती है।
