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नारायण सेवा संस्थान के 44 वें सामूहिक विवाह में 51 दिव्यांग जोड़े बने हमसफर

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नारायण सेवा संस्थान के 44 वें सामूहिक विवाह में 51 दिव्यांग जोड़े बने हमसफर

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उदयपुर, 31 अगस्त
नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ लियो का गुड़ा में रविवार को 44वां दिव्यांग एवं निर्धन निशुल्क सामूहिक विवाह समारोह सम्पन्न हुआ। दो दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन 51 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पवित्र अग्नि की साक्षी में सात फेरे लेकर जीवन के नए सफर की शुरुआत की।
समारोह में ऐसे जोड़े भी शामिल हुए जिनमें कोई दृष्टिबाधित, कोई पैरों या हाथ से दिव्यांग था, लेकिन संस्थान ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और अब वे एक-दूसरे का सहारा बनकर नई गृहस्थी बसाने जा रहे हैं। अधिकांश दूल्हा-दुल्हन संस्थान में नि:शुल्क सुधारात्मक सर्जरी और प्रशिक्षण के बाद आत्मनिर्भर बने और यहीं जीवनसाथी की तलाश भी पूरी हुई।
सुबह 10 बजे सभी जोड़ों की बिंदोली निकाली गई, जिसमें बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और बड़ी संख्या में उपस्थित बाराती-घराती शामिल हुए। इसके बाद दूल्हों ने तोरण रस्म पूरी कर विवाह मंडप में प्रवेश किया। रंग-बिरंगे मंच पर वरमाला के आदान-प्रदान के बाद गुलाब की पंखुड़ियों से उनका स्वागत हुआ। संस्थान संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया।


पवित्र अग्नि के सात फेरे 51 आचार्यों द्वारा विधिवत सम्पन्न कराए गए। देश-विदेश से आए सहयोगी, दानदाता और कन्यादाताओं ने इस अनोखे विवाह महाकुंभ का साक्षी बनकर नवदंपतियों को शुभकामनाएं दीं। पूर्व में संस्थान में विवाह कर चुके खुशहाल दंपति भी शामिल हुए और अपने अनुभव साझा कर नए जोड़ों का उत्साह बढ़ाया।
सभी नवविवाहितों को गृहस्थी बसाने हेतु बर्तन, पलंग, बिस्तर, पंखा, क्रॉकरी, चूल्हा सहित आवश्यक सामग्री उपहार स्वरूप दी गई। कन्यादाताओं ने मंगलसूत्र, चूड़ियां, चैन और सौंदर्य सामग्री भेंट की। विवाह स्थल पर मूक बधिर बच्चों के हस्तशिल्प स्टॉल ने भी अतिथियों का मन मोह लिया।


अंत में बेटियों की विदाई डोली के साथ भावुक माहौल में की गई। संस्थान परिवार ने सजल नेत्रों से उन्हें विदा किया और वाहनों से उनके गंतव्य तक पहुँचाया। यह अनूठा आयोजन सामाजिक सरोकार और मानवता का अद्भुत उदाहरण बना।

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