19 साल बाद आयड़ का रौद्र रूप
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आयड़ किनारे बस्तियों में घुसा पानी
2006 के बाद पहली बार इतना जलभराव, कई क्षेत्रों में मकान डूबे, कारें पानी में समाई
उदयपुर। 6 सितम्बर
लंबे इंतजार के बाद मेघ मेहरबान हुए तो जिलेभर में झमाझम बरसात ने चारों ओर पानी ही पानी कर दिया। वर्ष 2006 के बाद पहली बार ऐसी बारिश देखने को मिली, जब आयड़ नदी किनारे की बस्तियां जलमग्न हो गईं और निचले इलाकों में लोगों को मुश्किलें झेलनी पड़ीं। जिले में सबसे ज्यादा बारिश गोगुंदा में 123 मिमी, मदार में 118 मिमी और वल्लभनगर में 111 मिमी दर्ज हुई।
बीती मध्यरात्रि से शुरू हुई रिमझिम बारिश सुबह तक तेज हो गई। अलसुबह से ही शहर की सड़कों पर नदियां बहने लगीं। भूपालपुरा, न्यू भूपालपुरा, अशोकनगर, नवरत्न कॉम्प्लेक्स, साईफन चौराहा, बेदला, बड़गांव, अलीपुरा व कृष्णापुरा क्षेत्रों में कमर तक पानी भर गया। करजाली हाउस इलाके में कई मकानों की निचली मंजिलें डूब गईं और लोग छतों पर शरण लेने को मजबूर हुए। साइफन चौराहा पर सड़कों पर जलभराव से कारें डूब गईं।
जल संसाधन विभाग ने आयड़ नदी के उफान को देखते हुए उदयसागर बांध के गेट पांच फीट खोल दिए। फतहसागर और स्वरुपसागर के ओवरफ्लो का पानी भी आयड़ नदी में मिलने से प्रवाह और तेज हो गया। नदी पुलिया से टकराकर पानी नीचे से बहा, हालांकि 2006 की तरह पुलिया के ऊपर से पानी नहीं गया। आयड़ किनारे स्थित कई श्मशान घाट जलमग्न हो गए।
प्रशासन हरकत में
हालात का जायजा लेने जिला कलक्टर नमित मेहता और पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल साईफन चौराहा, नवरत्न कॉम्प्लेक्स व अन्य क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को तुरंत जलनिकासी और राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जलभराव प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता से जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, वहीं एसपी ने ट्रैफिक प्रबंधन और अतिरिक्त पुलिस बल तैनाती के आदेश दिए।
बारिश का आंकड़ा
मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को डबोक में अधिकतम तापमान 26.4 डिग्री और न्यूनतम 24.5 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह 8.30 बजे तक 30 मिमी और शाम 5.30 बजे तक 32 मिमी बारिश हुई। जल संसाधन विभाग के अनुसार गोगुंदा में 123 मिमी, मदार में 118, वल्लभनगर में 111, ओगणा में 78, सेई में 85 और उदयपुर शहर में 57 मिमी बारिश दर्ज की गई। जिले के कई तालाबों – मदार बड़ा, फतहसागर, स्वरुपसागर, उदयसागर सहित अन्य में पानी लबालब होकर ओवरफ्लो हो गया।
2006 बनाम 2024 बारिश
2006: आयड़ पुलिया के ऊपर से पानी बह निकला था, शहर का बड़ा हिस्सा बाढ़ जैसे हालात में डूब गया था।
2024: इस बार आयड़ पुलिया तक पानी पहुंचा जरूर, लेकिन पुलिया के ऊपर से नहीं बहा। हालात काबू में रहे, प्रशासन ने तुरंत राहत व निकासी कार्य शुरू किए।
