जीव प्रेम का अनूठा उदाहरण, पालतू श्वान का मनुष्य की भांति अंतिम संस्कार
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-पालतू स्वान ब्रूनो को समाजसेवी जोशी ने दी मानवीय विदाई
उदयपुर, 7 सितम्बर
भारतीय सनातन संस्कृति में जीव प्रेम का संस्कार डीएनए में है। चींटी दिखाई देने पर भी पांव रोकना बचपन में ही संस्कारों में शामिल हो जाता है। घर में यदि कोई जीव पाला जाता है तो वह घर के सदस्य की तरह ही हो जाता है। इन्हीं संस्कारों की झलक रविवार को एक पालतू श्वान की अंतिम विदाई पर नजर आई, जब पालक ने उसका अंतिम संस्कार अशोक नगर मोक्षधाम में हिन्दू अंतिम संस्कार रीति से किया।
यह श्वान कल्याण शक्ति पीठ के गादीपति और समाजसेवी डॉ. हेमंत जोशी के परिवार का पालतू ब्रूनो था। करीब साढ़े बारह वर्ष तक उनके परिवार में रहा। ब्रूनो के निधन पर उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया। अशोक नगर श्मशान घाट पर मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ ब्रूनो की चिता सजाई गई और परिवारजन व कल्याण सेना की उपस्थिति में अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ।
