आयड़ नदी पेटे में फिर बर्बाद हुए करोड़ों के काम
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बरसाती पानी ने उखाड़े कासिए के पत्थर और महंगे पौधे
पानी के बहाव के साथ आए मलबे में दबा सौंदर्यीकरण काम
उदयपुर, 8 सितम्बर
शहर की प्राचीर आयड़ नदी का पेटा स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर सौंदर्यीकरण किया गया था, लेकिन दो दिन की तेज बारिश ने इस मेहनत को धूल में मिला दिया। पुलों से लेकर सेवाश्रम पुलिया तक बिछाए गए मोटे कासिए के पत्थर हिल गए, लाखों रुपए के पौधे बह गए और पूरा पक्का काम मलबे में दब गया।
पहले भी चेतावनी थी, जिम्मेदार नहीं माने
स्मार्ट सिटी परियोजना के प्रथम वर्ष में आई पहली बारिश में ही नदी पेटे में बिछाए गए पत्थर और पौधों को नुकसान हुआ था। इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधि चेत नहीं पाए। तत्कालीन विधायक गुलाबचंद कटारिया के निर्देश पर पतले काशिए की जगह मोटी पट्टियां बिछाई गईं, तर्क था कि यह बहेंगी नहीं। लेकिन दो दिन की हालिया बारिश ने फिर साबित कर दिया कि नदी पेटे में पक्का निर्माण प्राकृतिक प्रवाह के लिए सुरक्षित नहीं।
पर्यावरणविदों की चेतावनी नजरअंदाज
विद्वानों का कहना था कि बहती नदी के पेटे में पक्का निर्माण नहीं होना चाहिए, इससे भूमिगत जल स्तर प्रभावित होता है। उनका सुझाव था कि केवल किनारों पर पक्की दीवार बनाकर अतिक्रमण रोका जाना चाहिए। लेकिन जिम्मेदारों ने उनका विरोध अनसुना किया और नदी पेटे में सौंदर्यीकरण कार्य जारी रखा।
पौधरोपण भी बेकार
प्रधानमंत्री के पौधा मां अभियान के तहत आयड़ नदी में लगाए गए हजारों महंगे पौधे भी बरसाती पानी के तेज वेग के आगे टिक नहीं पाए। विधायक ताराचंद जैन ने दावा किया था कि पौधों को नुकसान नहीं होगा, लेकिन दो दिन की बारिश ने यह दावा झूठा साबित कर दिया।
निगम का प्रावधान: 8 करोड़ रुपए
नगर निगम ने वर्ष 2025-26 के बजट में आयड़ नदी पेटे के मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए 8 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है। अब जिम्मेदारों की निगाह इस बजट पर है, ताकि बर्बाद हुए सौंदर्यीकरण को फिर से ठीक किया जा सके।
मोक्षधाम में मलबा
आयड़ नदी का उफान उतर तो गया, लेकिन शहर के अशोक नगर मोक्षधाम में मलबा छोड़ गया। सोमवार को भी नगर निगम के कार्मिक मोक्षधाम की सफाई में व्यस्त नजर आए। हालांकि, अंतिम संस्कार के लिए चिता स्थलों से सफाई कर दी गई है।
