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समय से पहले दस्तक दे सकता है सर्दी का सितम

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समय से पहले दस्तक दे सकता है सर्दी का सितम

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बदल रहा है मौसम का कैलेण्डर

सुभाष शर्मा
उदयपुर, 9 सितम्बर

मानसून के आखिरी दौर में उत्तर एवं पश्चिम भारत में हुई असाधारण बारिश और बाढ़ का असर अब अगले मौसम पर भी नजर आने लगा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश और नमी की स्थिति के कारण इस बार ठंड अपने तय समय से पहले शुरू हो सकती है।
अगस्त और सितंबर में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में औसत से सात-आठ गुना ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इससे मौसम असामान्य पैटर्न की ओर संकेत दे रहा है। नमी से भरी जमीन और लगातार बरसात के कारण मैदानी इलाकों में पाला और कोहरा भी समय से पहले पड़ सकता है। इसका असर फसलों से लेकर यातायात तक महसूस होगा।
भारत मौसम विभाग के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में मानसून की विदाई मध्य सितंबर से अंत तक होती है, लेकिन इस बार उत्तर एवं पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक बारिश का दौर अभी एक हफ्ता और रह सकता है। राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में 140 फीसदी से अधिक बारिश हो चुकी है, जिससे मिट्टी एवं हवा में नमी सामान्य से अधिक बनी रहने की संभावना है।
उदयपुर आए देहारादून के जलवायु विशेषज्ञ डॉ. माधवन नायर का कहना है कि आगामी 15 सितंबर के बाद भी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा, जिससे पहाड़ों में बर्फबारी सामान्य से 10–15 दिन पहले शुरू हो सकती है। इसका मतलब है कि दिवाली से पहले ही ठंड का अहसास होने लगेगा। यदि अक्टूबर के पहले सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो मैदानों का तापमान सामान्य से तीन-पाँच डिग्री तक नीचे जा सकता है। पक्षीय और महासागरीय स्थितियों पर नजर रखने वाली एजेंसी स्काइमेट का अनुमान है कि सितंबर से नवंबर के बीच ला-नीना सक्रिय होने की संभावना है। इसका असर भारत के तापमान और मौसम पर व्यापक रूप से पड़ेगा। आइएमडी के आंकड़े भी दिखाते हैं कि पहाड़ों में सर्दी का कैलेंडर बदल रहा है।

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