फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ नहीं लगा सकते
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डीजीएचएस ने कहा- केवल पंजीकृत चिकित्सक ही कर सकते हैं उपाधि का इस्तेमाल
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 11 सितम्बर
शहर के बड़े इलाकों में फिजियोथैरेपी सेंटर आसानी से देखने को मिल जाते हैं और इनके संचालक अक्सर अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) ने स्पष्ट किया है कि यह वैधानिक नहीं है। फिजियोथेरेपिस्ट को इस उपाधि का अधिकार नहीं है।
डीजीएचएस डॉ. सुनीता शर्मा ने दिशा—निर्देश जारी कर कहा कि केवल पंजीकृत चिकित्सक ही ‘डॉक्टर’ शब्द का उपयोग कर सकते हैं। फिजियोथैरेपिस्ट को मेडिकल डॉक्टर के रूप में प्रशिक्षित नहीं किया जाता, इसलिए उन्हें यह उपाधि लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मरीज और आमजन भ्रमित हो सकते हैं और नीम-हकीमों को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि फिजियोथैरेपिस्ट को प्राथमिक चिकित्सा करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। वे केवल रेफर किए गए मरीजों का इलाज करें, क्योंकि उन्हें चिकित्सीय स्थितियों का सही निदान करने की ट्रेनिंग नहीं होती। कई बार अनुचित फिजियोथेरेपी से मरीज की स्थिति और बिगड़ सकती है।
भारतीय चिकित्सा संघ ने उठाया था मामला
भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने भी इस मुद्दे को उठाया था। आईएमए अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली ने पटना हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया कि जब तक फिजियोथैरेपिस्ट राज्य चिकित्सा रजिस्टर में दर्ज नहीं होते, वे आधुनिक चिकित्सा पद्धति का अभ्यास नहीं कर सकते और न ही अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ शब्द लिख सकते हैं।
इससे पहले, तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल ने 2016 में फिजियोथेरेपिस्ट को ‘पैरामेडिक’ या ‘टेक्नीशियन’ ही माना था। वहीं, बेंगलुरु की अदालत ने 2020 में और मद्रास हाईकोर्ट ने 2022 में अपने फैसलों में साफ किया था कि फिजियोथैरेपिस्ट को ‘डॉक्टर’ शब्द के उपयोग की अनुमति नहीं है। अदालतों ने स्पष्ट किया कि उन्हें केवल चिकित्सक की निगरानी में काम करना चाहिए और आईएमसी अधिनियम के तहत डॉक्टर की मान्यता नहीं दी गई है।
