औरंगजेब विवाद से गरमाई सुखाड़िया यूनिवर्सिटी
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कांच टूटे, पुतले जले, बोले छात्र – कुलगुरु हटाओ वरना आंदोलन होगा उग्र
उदयपुर, 15 सितम्बर: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा के विवादित बयान ने विश्वविद्यालय परिसर का माहौल पूरी तरह गर्मा दिया है। मामला उस समय तूल पकड़ गया जब प्रो. मिश्रा ने 12 सितम्बर को एक शैक्षणिक सेमिनार में मुगल शासक औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ कहा। इसके बाद से छात्रों और संगठनों का विरोध लगातार तेज़ हो रहा है।
सोमवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। वे प्रशासनिक भवन के गेट पर पहुंचे और अंदर घुसने की कोशिश की। विरोध के दौरान दरवाज़ों के कांच तोड़े गए, कुलगुरु का पुतला भी जलाया गया और टायर फूंककर नारेबाजी की गई। स्थिति बिगड़ते देख विश्वविद्यालय प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी। बाद में रजिस्ट्रार वीसी गर्ग और एडिशनल एसपी उमेश ओझा ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति संभाली। आश्वासन के बाद छात्र शांत हुए, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि कुलगुरु को पद से हटाना ही पड़ेगा, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा।
कुलगुरु सुनीता मिश्रा ने सफाई देते हुए कहा कि उनके वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। वह मूलतः अहिन्दी भाषी हैं और भाषा संबंधी असमंजस के कारण अर्थ बिगड़ गया। उन्होंने कहा कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था और इसके लिए वे क्षमा मांग चुकी हैं।
लेकिन विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मयूरध्वज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कुलगुरु ने छात्रों और कर्मचारियों की समस्याओं की कभी सुध नहीं ली और मनमानी करते हुए निष्कासन आदेश जारी किए। भाजपा नेता डॉ. पंकज गोराणा ने कहा कि कुलगुरु ने ए-ग्रेड यूनिवर्सिटी को सी-ग्रेड पर ला दिया है। वहीं, राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह चुण्डावत ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल प्रभाव से उन्हें नहीं हटाया गया तो आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल जाएगा।
मेवाड़ क्षत्रिय महासभा शहर शाखा के अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह करेलिया और बजरंग सेना मेवाड़ के प्रमुख कमलेंद्र सिंह पंवार ने कुलपति सुनीता मिश्रा के औरंगज़ेब की प्रशंसा वाले बयान का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मेवाड़ के शौर्य का अपमान है।
