मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी भर्ती पर आमने-सामने आरएमसीटीए और एआरआईएसडीए
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उदयपुर, 16 सितम्बर राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी भर्ती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (आरएमसीटीए) है, जो भर्ती केवल राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से कराने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ऑल राजस्थान इन सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (एआरआईएसडीए) है, जो सरकार की “लेटरल एंट्री” प्रक्रिया का समर्थन कर रहा है।
मंगलवार को आंदोलन का सातवां दिन रहा, जब आरएमसीटीए ने दो घंटे का पेन-डाउन और शांतिपूर्ण धरना जारी रखा। संगठन का आरोप है कि सरकार “लेटरल एंट्री” के नाम पर मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती का गलत रास्ता अपना रही है। उनका कहना है कि यदि 2021 और 2024 की भर्ती प्रक्रियाएँ पूरी कर दी जातीं, तो फैकल्टी की कमी की स्थिति ही पैदा नहीं होती। आरएमसीटीए ने सरकार को सात सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है, जिसमें सहायक आचार्य स्तर पर भर्ती, केवल RPSC से चयन प्रक्रिया, डेमॉन्स्ट्रेटर को पदोन्नति, और नियुक्ति/समायोजन समिति को भंग करने जैसी मांगे शामिल हैं। संगठन का कहना है कि लेटरल एंट्री से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
लेटरल एंट्री का कदम सही नहीं : एआरआईएसडीए
एआरआईएसडीए के सचिव डॉ. तरुण रालोत का कहना है कि लेटरल एंट्री का कदम सही है, क्योंकि राज्य सेवा में कार्यरत ग्रुप-2 डॉक्टर पहले से ही चयनित हैं और बड़े सरकारी अस्पतालों में वर्षों से क्लिनिकल अनुभव रखते हैं। ऐसे डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा और मेडिकल छात्रों व मरीजों को अनुभवी चिकित्सकों का लाभ मिलेगा।
सरकार के कमेटी गठन की पहल सराहनीय : अरिस्दा
राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ—अरिस्दा के प्रदेश उपाध्यक्ष शंकर लाल बामनिया का कहना है कि राज्य सरकार के ग्रुप दो के डिग्रीधारी एवं डिप्लोमा चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक पद पर नियुक्त करने के लिए कमेटी गठन की पहल सराहनीय है। यह ना केवल मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पूरी करेगी, बल्कि अनुभवी चिकित्सकों का लाभ मेडिकल छात्र एवं मरीजों को मिलेगा।
दोनों कैडर एवं समान योग्यता वाले तो हठ किस लिए
सिरोही सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने कहा कि जब दोनों कैडर के डॉक्टरों की योग्यता समान है तो भेदभाव क्यों किया जा रहा है। राज्य के हर जिले में मेडिकल कॉलेज खुल चुके हैं, ऐसे में सरकार के लिए पर्याप्त फैकल्टी उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परिस्थिति में लेटरल एंट्री ही उचित समाधान है। डॉ. खराड़ी ने राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) से आग्रह किया कि वह हठ छोड़कर इस व्यवस्था को स्वीकार करे, ताकि चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था बाधित न हो और मेडिकल कॉलेजों को आवश्यक फैकल्टी समय पर मिल सके।
