कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा ने महाराणा प्रताप के वंशज से लिखित माफी मांगी
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विश्वराज ने पूछा-ऐसे बयानों को कब तक माफ करें?; औरंगजेब को कुशल शासक बताने का मामला
उदयपुर, 18 सितम्बर: मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी की कुलगुरु प्रोफेसर सुनीता मिश्रा ने हाल ही में दिए गए विवादित बयान को लेकर महाराणा प्रताप के वंशज और नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ को लिखित माफीनामा भेजा है। इस माफीनामे में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान से राजस्थान, मेवाड़ और विशेषकर राजपूत समाज की भावनाएं आहत हुई हैं, और इसके लिए वे क्षमा चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं था और वे वीरों की इस धरती पर किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं रखती थीं।
प्रो. सुनीता मिश्रा ने 12 सितंबर को यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में कहा था कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और अकबर जैसे कई राजा-महाराजाओं के बारे में सुना जाता है। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि “इतिहास में कुछ औरंगजेब जैसे कुशल प्रशासक भी थे।” इस बयान के सोशल मीडिया और मीडिया कवरेज के बाद विवाद बढ़ गया।
विवाद बढ़ने पर कुलगुरु ने एक वीडियो जारी करते हुए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका वक्तव्य तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और यदि पूरे वक्तव्य को सुना जाए तो स्पष्ट होगा कि उन्होंने औरंगजेब की प्रशंसा में कुछ नहीं कहा। प्रोफेसर ने बताया कि वे मूलतः अहिंदी भाषी हैं, जिससे भाषाई कारणों से गलतफहमी हुई। उन्होंने कहा कि उनका मंतव्य किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था, और यदि उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची हो, तो वे खेद प्रकट करती हैं।
माफीनामे के मिलने के बाद विधायक विश्वराज सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लोगों से सवाल किया कि इतिहास पर ऐसे बयानों को कब तक माफ किया जाए। उनके इस सवाल ने फिर से इतिहास, सामाजिक भावनाओं और अकादमिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर चर्चा को तेज कर दिया है। मामले में कुलगुरु ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए और लोगों से क्षमा मांगते हुए विवाद को नियंत्रित करने की कोशिश की है।
