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बेंगलुरु कोर्ट का फैसला: RSS कोई धार्मिक संगठन नहीं, CM सिद्धारमैया की शिकायत खारिज

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बेंगलुरु कोर्ट का फैसला: RSS कोई धार्मिक संगठन नहीं, CM सिद्धारमैया की शिकायत खारिज

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा था – RSS और बजरंग दल अपराधियों का संगठन

बेंगलुरु, 19 सितम्बर: बेंगलुरु की अदालत ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया। यह शिकायत उनके उस बयान के आधार पर की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि RSS और बजरंग दल अपराध करते हैं।
अधिवक्ता किरण एन ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप लगाए थे। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट केएन शिवकुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि RSS कोई धार्मिक संगठन नहीं है, और उसकी वेबसाइट पर भी इसे धर्म से नहीं जोड़ा गया है। इसलिए यह बयान किसी धर्म या धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाला नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने आगे कहा कि यह बयान विधानसभा की बहस का हिस्सा था, और विधायक विशेषाधिकार (अनुच्छेद 194(2), भारतीय संविधान) के तहत संरक्षित है। वहीं, शिकायतकर्ता ने RSS की ओर से अधिकृत व्यक्ति होने का प्रमाण भी पेश नहीं किया।
सिद्धारमैया ने यह बयान 17 मार्च 2025 को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए दिया था। उन्होंने कहा था, “अपराध नहीं होना चाहिए, लेकिन कई अपराध RSS और बजरंग दल ही करते हैं।”
सिद्धारमैया कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने 20 मई 2023 को दूसरी बार यह पद ग्रहण किया था। अदालत का यह निर्णय उनके पक्ष में आया है और इसे राजनीतिक और संवैधानिक बहस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है।
यह मामला राज्य में RSS और बजरंग दल की गतिविधियों को लेकर चर्चा का केंद्र भी रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी संगठन के धार्मिक या गैर-धार्मिक होने का निर्णय कानूनी दस्तावेज और वेबसाइट जैसी आधिकारिक जानकारी पर आधारित होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक बयान पर।

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