किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद
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पोक्सो कोर्ट का फैसला
उदयपुर, 23 सितम्बर: विशेष न्यायालय, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की पीठासीन अधिकारी तारा अग्रवाल ने किशोरी को बहला-फुसलाकर दुष्कर्म और गर्भवती करने के मामले में आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास और आर्थिक दंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जिले के सदर थाना क्षेत्र के एक कस्बे में निवासरत व्यक्ति ने 20 अगस्त 2022 को महात्मा गांधी चिकित्सालय में सदर थाना पुलिस को रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताया कि उसकी नाबालिग पुत्री को पेट दर्द की शिकायत पर उसे कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त चिकित्सक को दिखाया। खून की कमी और लीवर की समस्या बताते हुए दवाइयां दी। इसके बाद भी राहत नहीं होने पुत्री को लेकर महात्मा गांधी चिकित्सालय गए। वहां जांच के बाद चिकित्सक ने पुत्री को गर्भवती बताया। पूछने पर पुत्री ने बताया कि कस्बे में रहने वाला युवक विजयदास उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और दुष्कर्म किया। शर्म के कारण उसने यह बात किसी को नहीं बताई।
रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी विजयदास पिता कमलदास बैरागी निवासी बोरी प्रतापगढ़ के खिलाफ भादंसं की धारा 363, 376 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 पोक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। अनुसंधान के बाद आरोपी को गिरफतार कर उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। अनुसंधान के दौरान ही पीड़ित ने बच्चे को जन्म दिया। इस पर पुलिस ने डीएनए जांच के लिए सैम्पल लिया। डीएनए जांच में नवजात का जैविक पिता विजयदास होना बताया गया। न्यायाधीश तारा अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान पेश साक्ष्य, गवाह आदि के आधार पर विजयदास को किशोरी से दुष्कर्म का दोषी माना।
विशिष्ट लोक अभियोजक हेमेन्द्रनाथ पुरोहित ने बताया कि न्यायालय ने आरोपी विजयदास को धारा 363 के तहत तीन साल का कठोर कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदण्ड, धारा 366 के तहत 4 साल का कठोर करावास और 10 हजार रुपए अर्थदण्ड तथा पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई।
