माही ने मिटाया कालेपानी का दंश, अब परमाणु बिजलीघर से विकास को लगेंगे पंख
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उदयपुर, 24 सितम्बर: राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की सीमाओं से घिरे बांसवाड़ा जिले को आजादी के बाद संसाधनों के अभाव और पिछड़ेपन के कारण “कालेपानी” कहा जाता था। अधिकारियों को दंडस्वरूप यहां भेजा जाता था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के प्रयासों से बने माही बांध ने जिले की तस्वीर बदल दी। चार दशक पहले शुरू हुई इस परियोजना ने 80 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई सुविधा दी और हजारों किलोमीटर लंबा नहरी तंत्र विकसित किया। पन बिजलीघर से हर साल करोड़ों यूनिट बिजली उत्पादन होने लगा और कृषि आत्मनिर्भर हुई।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितम्बर को पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर बांसवाड़ा के नापला में माही परमाणु बिजलीघर की आधारशिला रखेंगे। 45 हजार करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 750 मेगावाट क्षमता के चार रिएक्टर लगेंगे, जिनसे कुल 2800 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। 623 हेक्टेयर में बनने वाला यह प्लांट हजारों लोगों को रोजगार देगा और जिले को विकास के नए पंख मिलेंगे।
तैयारियां अंतिम चरण में
परमाणु बिजलीघर के साथ बांसवाड़ा को डूंगरपुर-रतलाम और नीमच-नंदुरबार रेलवे लाइन से जोड़ने की राह आसान होगी। साथ ही जिले से गुजर रहे दो राष्ट्रीय राजमार्गों को फोरलेन बनाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
पलायन से मिलेगी मुक्ति
आज भी बांसवाड़ा के हजारों लोग रोजगार के लिए गुजरात-महाराष्ट्र पलायन करते हैं। उद्योगों की स्थापना, रेलवे और फोरलेन सड़कों के साथ यह पलायन रुक सकेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से जिला आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।
विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास-उद्घाटन
प्रधानमंत्री मोदी बांसवाड़ा से 1.22 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इनमें से 1.08 लाख करोड़ की परियोजनाएं राजस्थान को मिलेंगी। इसके अलावा राज्य सरकार के 30,339 करोड़ से अधिक के 48 विकास कार्य भी पूरे होंगे। कार्यक्रम में 15 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। अंत में प्रधानमंत्री पीएम कुसुम योजना के लाभार्थियों से संवाद करेंगे।
