मोरारजी ने शुरू की विकास गाथा, अब मोदी लिखेंगे वागड़ की नई कहानी
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सुभाष शर्मा
उदयपुर, 24 सितम्बर: दक्षिण राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र का विकास जिस माही परियोजना से शुरू हुआ, वह कई मायनों में ऐतिहासिक रही है। आजादी के बाद 1960 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मोरारजी देसाई ने इसकी नींव रखी। इससे पहले वागड़ का इलाका गरीबी, अकाल और बदरंग तस्वीर से जूझ रहा था, जिसे ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता साहित्यकार पन्नालाल पटेल ने अपने उपन्यासों में दर्ज किया।
परियोजना की प्रायोगिक शुरुआत मोरारजी देसाई के हाथों और आदिवासियों के मसीहा भीखाभाई के प्रयासों से हुई। बाद में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी की विशेष कोशिशों से यह सपना साकार हुआ। माही परियोजना की मूल परिकल्पना बांसवाड़ा के पहले प्रधानमंत्री भूपेंद्र नाथ त्रिवेदी ने चंद्रसागर बांध के रूप में की थी।
1 नवंबर 1983 इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक तारीख बनी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नहरों में जल प्रवाह का शुभारंभ कर वागड़ की तकदीर बदलने की शुरुआत की। इससे क्षेत्र को सिंचाई और बिजली की सुविधा मिली और आदिवासी अंचल की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर बदल गई।
माही परियोजना की कहानी को सामने लाने के लिए 1986 में फिल्म माही दर्शन बनाई गई। पहली वागड़ी फिल्म तण वाटे के निर्देशक प्रदीप द्विवेदी ने इसकी स्क्रिप्ट और आवाज दी। फिल्मांकन साहले सईद, संपादन इंजीनियर भंवर पांचाल और संवाद लेखन पन्नालाल मेघवाल ने किया। परियोजना के तत्कालीन मुख्य अभियंता डीएम सिंघवी, जनसंपर्क अधिकारी गोपेन्द्रनाथ भट्ट और कई अभियंताओं का इसमें योगदान रहा।
आज वागड़ की वही धरती एक नए मोड़ पर खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांसवाड़ा आकर 42 हजार करोड़ की लागत वाली 2800 मेगावाट माही बांसवाड़ा परमाणु विद्युत परियोजना का शिलान्यास करने जा रहे हैं। चर्चा में है कि जिस तरह मोरारजी देसाई ने वागड़ के पहले विकास की कहानी लिखी, उसी तरह अब पीएम नरेंद्र मोदी इस क्षेत्र की विकास यात्रा की दूसरी गाथा लिखेंगे।
