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उदयपुर में खिरनी की नई प्रजाति की खोज

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उदयपुर में खिरनी की नई प्रजाति की खोज

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खिलौने बनाने के लिए उपयुक्त लकड़ी में मिला नया वैराइटी

उदयपुर, 24 सितम्बर (पंजाब केसरी): राजस्थान की जैव विविधता में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए उदयपुर जिले में खिरनी की नई प्रजाति राइटिया डोलीकोकारपा की पहली उपस्थिति दर्ज की गई है। यह लकड़ी खिलौने बनाने के लिए उपयुक्त मानी जाती है। नई प्रजाति की खोज पूर्व वन अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. सतीश कुमार शर्मा और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के फील्ड बायोलॉजिस्ट डॉ. अनिल सरसावन ने की। खोज उदयपुर के उबेश्वर वन क्षेत्र और गोगुन्दा तहसील के ओबरा खुर्द गांव में हुई।
उदयपुर का रहा गौरवशाली इतिहास
उदयपुर एक समय देशभर में खिरनी की लकड़ी से बने खिलौनों के लिए प्रसिद्ध था। उस समय खिलौने बनाने में मुख्य रूप से दो प्रजातियों का उपयोग होता था: राइटिया टिंक्टोरिया और राइटिया टोमेनटोसा। नई प्रजाति राइटिया डोलीकोकारपा इसी परंपरा को नया जीवन देने वाली मानी जा रही है।
पचपन साल बाद राज्य में पहली उपस्थिति
राइटिया डोलीकोकारपा का पहला वैज्ञानिक उल्लेख 1969 में नगर हवेली के बोन्टावन क्षेत्र से हुआ था। इसे वनस्पति वैज्ञानिक के. बहादुर और एस.एस.आर. बैनेट ने पहचाना था, और यह खोज 1978 में प्रकाशित हुई। लगभग 55 साल बाद यह प्रजाति अब राजस्थान में दर्ज की गई है। इस नई खोज के साथ उदयपुर में राहटिया वंश की कुल तीन खिरनी प्रजातियां विद्यमान हो गई हैं, जो क्षेत्र के वनस्पति और पारंपरिक हस्तकला इतिहास में उल्लेखनीय योगदान देती हैं।

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