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सरकारी लेक्चरर ने टमाटर की खेती से बदली किस्मत

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सरकारी लेक्चरर ने टमाटर की खेती से बदली किस्मत

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रिसर्च से बदला खेती का तरीका

उदयपुर, 26 सितम्बर: सरकारी स्कूल के लेक्चरर प्रकाश जाट ने पारंपरिक खेती छोड़कर टमाटर उत्पादन में हाथ आजमाया और अब वे लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। भीमगढ़ (राशमी) निवासी जाट ने मात्र 10 हजार रुपए खर्च कर आधे बीघे खेत में टमाटर लगाए थे और पहली ही बार में उन्हें 1.75 लाख रुपए की आमदनी हुई। इसके बाद उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया और लगातार सफलता पाई।
मां और बहन ने संभाला परिवार
प्रकाश के पिता किशनलाल का निधन तब हो गया था जब वे 12 साल के थे। परिवार की जिम्मेदारी मां चमकूबाई और बहन बालीबाई ने संभाली। उन्होंने शिक्षा जारी रखी और आज प्रकाश सरकारी स्कूल में लेक्चरर हैं। परिवार के पास 15 बीघा जमीन है, जिस पर पहले पारंपरिक खेती से केवल 25 हजार तक की आय होती थी। साल 2023 में प्रकाश ने टमाटर की खेती पर रिसर्च की और पाया कि भीमगढ़ की मिट्टी और पानी इसके लिए अनुकूल हैं। देसी तरीके से बेड बनाकर खेती शुरू की।
साल-दर-साल बढ़ा मुनाफा
पहले साल आधे बीघे पर 10 हजार खर्च कर 1.65 लाख शुद्ध मुनाफा हुआ। दूसरे साल 1 बीघे पर 50 हजार खर्च कर 200 क्विंटल टमाटर उगाए और 4.50 लाख कमाए। इस बार 1.5 बीघे में 35 हजार खर्च कर करीब 350 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है। भाव सही मिलने पर 7 से 8 लाख तक मुनाफा हो सकता है।
पौध तैयार करने से मंडियों तक
जुलाई से पौधे तैयार कर रोपाई की जाती है और फसल फरवरी-मार्च तक चलती है। फंगस और कीटों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव जरूरी होता है। गर्मियों में 6 दिन और सर्दियों में 15 दिन पर सिंचाई करनी पड़ती है। जाट बताते हैं कि टमाटर का भाव बाजार पर निर्भर करता है। उनकी फसल अजमेर, कोटा, जयपुर, उदयपुर और भीलवाड़ा मंडियों में सप्लाई होती है। अच्छी मांग के समय कीमत 40 रुपए किलो तक पहुंच जाती है। प्रकाश का कहना है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाए तो खेती घाटे का नहीं, बल्कि लाभ का सौदा बन सकती है।

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