उदयपुर को चाहिए 600 मेगावाट बिजली, मिल रही 500
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बढ़ रहे बिजली फॉल्ट के मामले, उपभोक्ताओं को नहीं मिल रही रेगुलर सप्लाई
निगम अधिकारियों पर शिकायतों का अंबार, ठेकेदारी प्रणाली को बता रहे जिम्मेदार
उदयपुर, 29 सितम्बर (राजेश वर्मा): झीलों की नगरी उदयपुर इन दिनों बिजली संकट से जूझ रही है। करीब दो लाख उपभोक्ताओं को प्रतिदिन औसतन 600 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें केवल 500 मेगावाट ही मिल पा रही है। मांग और आपूर्ति के बीच इस 100 मेगावाट के अंतर ने हालात बिगाड़ दिए हैं। परिणामस्वरूप शहर में लगातार बिजली फॉल्ट बढ़ रहे हैं और उपभोक्ताओं को बिना सूचना घंटों अघोषित कटौती झेलनी पड़ रही है।
विद्युत खपत अधिक होने पर फीडरों पर लोड बढ़ जाता है, जिससे किसी न किसी इलाके में रोजाना बड़ा फॉल्ट सामने आ रहा है। हालांकि अजमेर विद्युत वितरण निगम (एवीवीएनएल) समय-समय पर शटडाउन लेकर रखरखाव करता है, पर अचानक आने वाले फॉल्ट उपभोक्ताओं को परेशान कर रहे हैं। घरेलू जीवन से लेकर व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई बार बिजली पांच से छह घंटे तक गुल रहती है और शिकायतों पर भी तुरंत सुनवाई नहीं हो पाती।
एवीवीएनएल के एसई केआर मीना का कहना है कि उदयपुर की मांग 600 मेगावाट तक पहुंच रही है। अभी बिजली रावतभाटा, चित्तौड़गढ़, मांडल और नाथद्वारा से मिलती है। नया देबारी ग्रिड शुरू होने पर कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी। वहीं स्मार्ट सिटी क्षेत्र के 17 वार्डों में मेंटिनेंस की जिम्मेदारी ठेकेदार कंपनी एलएनटी को सौंपी गई है। अधिकारी मानते हैं कि वहां की समस्याओं की जानकारी समय पर विभाग तक नहीं पहुंच पाती।
दूसरी ओर अजमेर विद्युत वितरण निगम श्रमिक संघ का कहना है कि उदयपुर में मौजूदा 758 कर्मचारियों की जगह करीब 1200 की आवश्यकता है। स्टाफ की कमी के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार है और कामकाज प्रभावित हो रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि निगम अधिकारी ठेकेदारी प्रणाली के आगे लाचार हैं। यदि जल्द ही ग्रिड विस्तार और स्टाफ की कमी को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले महीनों में बिजली संकट और गहरा सकता है।
