LOADING

Type to search

सरकार और खादी संस्थाओं की खींचतान पड़ी जनता की जेब पर भारी

Local

सरकार और खादी संस्थाओं की खींचतान पड़ी जनता की जेब पर भारी

Share

गांधी जयंती पर खादी पर नहीं मिली 50 प्रतिशत की छूट
संस्थाओं ने 100 करोड़ बकाया रिबेट भुगतान की मांग उठाई
संस्थाओं ने 25 प्रतिशत की छूट की व्यवस्था की

उदयपुर, 2 अक्टूबर (ओमपाल): गांधी जयंती पर हर साल खादी उत्पादों पर दी जाने वाली विशेष छूट का इंतजार इस बार ग्राहकों को निराश कर गया। नव निर्माण संघ उदयपुर और प्रदेश की अन्य प्रमाणित खादी संस्थाओं ने छूट के आदेश को दरकिनार पर ऐलान कर दिया कि जब तक राज्य सरकार पिछले सालों की बकाया रिबेट राशि का भुगतान संस्थाओं को नहीं करती, तब तक राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त 35 प्रतिशत की छूट नहीं दी जाएगी। शेष 15 प्रतिशत में 10 प्रतिशत अतिरिक्त मिलाकर संस्थाएं 25 प्रतिशत छूट देंगी।
दरअसल, हर साल गांधी जयंती से गांधी पुण्यतिथि तक खादी पर 50 प्रतिशत छूट मिलती है। इस छूट में 35 प्रतिशत हिस्से का राज्य सरकार पुनर्भुगतान करती है। खादी संस्थाओं का कहना है कि वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 से पुनर्भुगतान नहीं हुआ है और यह राशि करीब 100 करोड़ रुपए पहुंच चुकी है।
राजस्थान खादी ग्रामोद्योग संस्था संघ, जयपुर के मंत्री अनिल कुमार शर्मा कहते हैं कि पुनर्भुगतान नहीं होने के चलते स्टाफ की सैलरी देना मुश्किल हो रहा है। संस्थाएं छूट अपनी जेब से कैसे दें। उन्होंने बताया कि गांधी जयंती पर गुरुवार को जयपुर स्थित उनके प्रतिष्ठान पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी और मंत्री मदन राठौड़ आए थे, परंतु उनसे भी केवल आश्वासन ही मिला।
संस्थाओं का कहना है कि न केवल बकाया भुगतान लंबित है, बल्कि 2024-25 की रिबेट ऑडिट प्रक्रिया भी जटिल बनी हुई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि तुरंत बकाया राशि का भुगतान किया जाए और ऑडिट को सरल बनाया जाए, ताकि संस्थाओं और बुनकर परिवारों को राहत मिल सके।
हालांकि, इस परिस्थिति में भी खादी संस्थाओं ने आम आदमी के लिए 25 प्रतिशत छूट की व्यवस्था की है। नव निर्माण संघ उदयपुर के मंत्री कैलाशचंद्र पालीवाल ने बताया कि खादी संस्थाएं अब अपने स्तर पर अधिकतम 25 प्रतिशत तक (15% एमएमडीए और 10% विपणन विकास के तहत प्रदत्त) छूट ग्राहकों को दे रही हैं।
संस्थाओं ने चिंता जताई है कि भुगतान लंबित रहने से बुनकरों की तीसरी पीढ़ी तक की आजीविका संकट में है। संस्थाओं का दर्द है कि उनके पास न तो आधुनिक प्रचार-प्रसार का साधन है, न ही स्टाफ को समय पर दे पाने के लिए वेतन। सोशल मीडिया के दौर में भी हम विज्ञापन नहीं कर पाते। साथ ही, संघ के मंत्री अनिल शर्मा ने यह भी कहा कि खादी के चाहने वालों की निराशा पर वे क्षमाप्रार्थी हैं, लेकिन खादी संस्थाओं को जीवित रखने के लिए राशि तो चाहिए होगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *