एमजी अस्पताल : ट्रोमा वार्ड में मिला खाली सिलेंडर, दावा और हकीकत में बड़ा फर्क
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बांसवाड़ा, 6 अक्टूबर (उदयपुर डेस्क): जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रामा सेंटर में आग लगने की घटना के बाद बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय की सुरक्षा व्यवस्था की जांच में लापरवाही उजागर हुई है। अस्पताल प्रबंधन ने अग्निशमन की माकूल व्यवस्था होने का दावा किया, लेकिन जांच के दौरान ट्रोमा वार्ड में लगा सिलेंडर खाली मिला, जिसकी रीफिलिंग तक नहीं कराई गई थी।
आदिवासी बहुल क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के नाते महात्मा गांधी चिकित्सालय में रोजाना सैकड़ों मरीज ओपीडी और आईपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां मेडिकल, सर्जरी, जनाना, शिशु, अस्थि, आंख और आईसीयू सहित कई वार्ड हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य हैं।
जांच में खुला लापरवाही का मामला
एसएमएस अस्पताल हादसे के बाद जब एमजी चिकित्सालय का निरीक्षण किया गया, तो प्रवेश द्वारों, वार्डों और ओपीडी के बाहर अग्निशमन सिलेंडर तो लगे मिले, लेकिन ट्रोमा वार्ड — जो अस्पताल का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है — में लगा सिलेंडर पूरी तरह खाली मिला। उस पर लगा स्टीकर मिट चुका था और अप्रैल 2025 की रीफिलिंग तिथि के बाद कोई अद्यतन नहीं किया गया था।
सीएमओ बोले, कराएंगे तुरंत रीफिल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश माहेश्वरी ने बताया कि अप्रैल माह में अस्पताल परिसर के 89 सिलेंडरों की रीफिलिंग कराई गई थी। ट्रोमा वार्ड के सिलेंडर के खाली होने की जानकारी नहीं थी, जिसे अब तुरंत रीफिल कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल में बिजली से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को निर्देश दिए गए हैं।
