6 हजार आदिवासी बच्चों की थाली पर संकट
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डूंगरपुर के जनजाति छात्रावासों में भोजन संकट गहराया
मई से भुगतान अटका, सप्लायरों ने उधारी बंद की
डूंगरपुर, 8 अक्टूबर (उदयपुर डेस्क): जिले के 69 जनजाति छात्रावासों में रहने वाले 6 हजार से अधिक आदिवासी बच्चों के सामने अब भूख का संकट खड़ा हो गया है। मई महीने से भोजन सप्लाई का भुगतान रुका होने के कारण छात्रावासों की रसोई व्यवस्था चरमराने लगी है। अब तक वार्डन दुकानदारों से उधारी में भोजन व्यवस्था चला रहे थे, लेकिन अब सप्लायरों ने भी आगे राशन देने से इनकार कर दिया है। अनुमानित तौर पर 10 करोड़ रुपये की उधारी हो चुकी है, जिससे बच्चों के लिए नियमित भोजन सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है।
डूंगरपुर के जनजाति विभाग के तहत संचालित छात्रावासों में प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक के बच्चे रहते हैं। प्रतिदिन सुबह नाश्ता, दूध और दो समय का भोजन दिया जाता है। सप्ताह में तीन दिन फल और रविवार को मीठा भोजन भी शामिल होता है। लेकिन अब कई छात्रावासों में दूध, फल और अनाज की कमी शुरू हो गई है। कुछ जगहों पर केवल न्यूनतम भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
पुराना टेंडर निरस्त, नया टेंडर नहीं हुआ
भोजन सामग्री पहले उपभोक्ता भंडार के माध्यम से आती थी, लेकिन पोषाहार की लगातार शिकायतों के बाद पुराना टेंडर निरस्त कर दिया गया। सहकारी उपभोक्ता भंडार ने आगे सप्लाई करने से इनकार किया। नए टेंडर में देरी के कारण बच्चों की थाली पर असर पड़ा।
वार्डनों पर बढ़ा बोझ
प्रति बच्चे का औसत भोजन खर्च 3,000 से 3,500 रुपये प्रति माह है। छह हजार बच्चों पर पांच महीने का खर्च जोड़ने पर उधारी 10 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। वार्डन अब स्थानीय दुकानदारों से उधारी में ही बच्चों को खाना दे रहे थे।
बजट आते ही कराएंगे भुगतान :उपायुक्त
क्षेत्रीय जनजाति विभाग डूंगरपुर के उपायुक्त डॉ. सत्य प्रकाश कच्छवाहा ने कहा, “छात्रावासों से आए बिल हेड ऑफिस को भेज दिए गए हैं। जैसे ही बजट स्वीकृत होता है, भुगतान कर दिया जाएगा। मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है।”
