बलीचा क्षेत्र में कचरा यार्ड बना मौत का अड्डा
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जहरीले धुएं, दुर्गंध और बीमारियों से जूझ रहे हजारों लोग; आईआईएम के छात्र भी प्रभावित
उदयपुर, 9 अक्टूबर (राजेश वर्मा): बलीचा क्षेत्र में नगर निगम के कचरा डंपिंग यार्ड से उठते जहरीले धुएं और फैली गंदगी ने स्थानीय बाशिंदों का जीना दूभर कर दिया है। आए दिन लगने वाली आग और सड़ांध के कारण क्षेत्रवासी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। लोगों में सांस, त्वचा, दमा और बुखार जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।
दक्षिण विस्तार योजना के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के निवासियों ने बताया कि प्रदूषित वातावरण से हजारों लोग स्वास्थ्य जोखिम में हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के वर्ष 2023 के आदेशों के बावजूद जिला प्रशासन, नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की। नियमों के तहत तीन माह में सुधारात्मक कदम उठाए जाने थे, मगर आज भी गीला-सूखा कचरा मिलाकर डंप किया जा रहा है और आग लगाना जारी है।
वर्षा के बाद कचरे में सड़ांध और बढ़ गई है। क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स “वेरी पूअर” श्रेणी में पहुंच गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हालात ऐसे हैं कि एक दिन लोग अपने ही घरों में दम तोड़ देंगे।
आईआईएम के 800 विद्यार्थी और 65 परिवार प्रभावित
भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) उदयपुर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सिवा कुमार मथाड़ा ने जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिखकर स्थिति सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि कचरे की आग और धुएं से संस्थान के 800 विद्यार्थी और 65 परिवार बीमार हो रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
गायों की मौत और दूषित दूध का खतरा
यार्ड में बड़ी संख्या में गायें कचरा और प्लास्टिक खा रही हैं। प्लास्टिक खाने से कई गायें वहीं तड़प-तड़प कर मर रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी अदालत में झूठी रिपोर्टें पेश कर रहे हैं और केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।
अकाल मौत दे रहा कचरा यार्ड
गिर्वा पंचायत समिति की रिपोर्ट (8 मई) में भी कहा गया कि कचरे की आग और दुर्गंध से क्षेत्र में जानलेवा बीमारियां फैल रही हैं। मक्खियों-मच्छरों का प्रकोप बढ़ चुका है। निवासियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि हालात नहीं सुधरे तो धरना और भूख हड़ताल की जाएगी।
