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मांडवा की करुणकथा: 17 आदिवासी परिवारों पर टूटा ‘चढ़ोतरा’का कहर

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मांडवा की करुणकथा: 17 आदिवासी परिवारों पर टूटा ‘चढ़ोतरा’का कहर

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40 दिन से न्याय की आस में भटक रहे 103 लोग -खेत जले, घर उजड़े, बच्चे स्कूल से दूर और प्रशासन अब तक मौन
उदयपुर, 11 अक्टूबर :
उदयपुर-गुजरात सीमा के मांडवा थाना क्षेत्र से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को झकझोर दिया है। घरा ग्राम पंचायत में रहने वाले 17 आदिवासी परिवारों के 103 लोग पिछले 40 दिनों से भय, भूख और बेघरपन में जी रहे हैं। इन्हें अपने ही गांव से “चढ़ोतरा”के तहत निकाल दिया गया और अब ये परिवार जंगलों और दूरदराज इलाकों में मजदूरी कर जीवन गुजार रहे हैं।
घटना की शुरुआत 9 अगस्त से हुई, जब नानिया गमेती की नाबालिग बेटी लापता हो गई। पता चला कि गांव का ही युवक मन्नाराम उसे बहला-फुसलाकर ले गया था। नानिया ने बेटी को खोज निकाला और पंचायतमें मामला पहुंचा। पंचायत ने लड़की को नानिया को सौंपते हुए मन्नाराम के पिता खेतिया पर जुर्माना लगाया। अपमान और मानसिक दबाव से टूटकर मन्नाराम ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद खेतियाने 40-50 लोगों का समूह बनाकर नानिया और उसके परिजनों पर हमला बोल दिया।
गुस्साई भीड़ ने नानिया के खेत पर ही मन्नाराम का अंतिम संस्कार किया और 17 परिवारों के घरों को उजाड़ दिया। हमलावरों ने करीब 40 बीघा सौंफ और मक्का की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया, दो गायों को गोली मार दी और घरों से एक लाख रुपए नकद सहित सामान लूट लिया। 20 से अधिक बच्चों की किताबें, पहचान पत्र और स्कूल दस्तावेज़ भी फाड़ दिए गए, जिससे उनकी पढ़ाई ठप पड़ गई। बेघर हुए ये परिवार सिरोही और आबू जैसे इलाकों में छिपकर मजदूरी कर रहे हैं। पीड़ितों ने न्याय के लिए मांडवा थाने से लेकर जिला कलेक्टर, एसपी और आईजी तक बार-बार गुहार लगाई, लेकिन उनका आरोप है कि उनकी शिकायतें दबा दी गईं और कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नानिया ने एक स्थानीय सचिव पर धमकी देने और राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल करके मामले को दबाने का भीआरोप लगाया है। वहीं, इस बारे में मांडवा थानाधिकारी देवीलाल मीणा ने कहा कि पुलिस द्वारा मामले में अनुसंधान जारी है। पीड़ित पुलिस से आकर मिल नहीं रहा। वहीं, पीड़ित पक्ष का कहना कि जब विपक्षी खुलेआम उन्हें जान से मारनेवाली धमकी दे रहे हैं वह भला ऐसे कैसे सामने आ सकता है।

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