जिसने संभाजी के टुकड़े किए, मंदिर तोड़, वह औरंगजेब कैसे हो सकता है कुशल प्रशासक : राज्यपाल बागड़े
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सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु के पुराने बयान पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े की प्रतिक्रिया, बोले—शब्द सोच-समझकर बोलने चाहिए
उदयपुर, 12 अक्टूबर: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा के पुराने बयान पर उठा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। रविवार को राज्यपाल हरिभाऊ बागडे़ ने कहा“औरंगजेब कैसे कुशल प्रशासक हो सकता है? उसने छत्रपति शिवाजी के पुत्र संभाजी महाराज के हाथ-पैर तोड़े, जीभ काटी और शरीर के टुकड़े कर दिए। उसने मंदिरों को तोड़ा, तो यह कैसे अच्छा प्रशासन हो सकता है?”
राज्यपाल बागडे़ ने कहा कि जीवन में सोच-समझकर बोलना चाहिए, क्योंकि शब्द हमारी संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु का बयान चर्चा का विषय रहा है, जिसमें उन्होंने औरंगजेब को कुशल प्रशासक बताया था। इस पर लोगों ने प्रश्न उठाए थे कि आखिर ऐसा कैसे कहा जा सकता है।
“शब्दों पर संयम रखें, वाणी हमारी संपत्ति है”
राज्यपाल ने कहा कि लोगों को जो पसंद आए वैसा ही बोलना चाहिए। अपनी वाणी और शब्दों पर संयम रखें, क्योंकि यही हमारी संपत्ति हैं। फिजूल बातें न करें, क्योंकि हमारे शब्दों का प्रभाव दूसरों पर पड़ता है। अच्छी आदतें अपनाकर ही जीवन और समाज बेहतर बन सकता है।
“कौटिल्य का अर्थशास्त्र पढ़ें, व्यवहार का हिसाब रखें”
राज्यपाल बागडे़ रविवार को डबोक स्थित एग्रीकल्चर साइंसेस कॉलेज के सभागार में आयोजित ऑल इंडिया अकाउंटिंग कॉन्फ्रेंस एंड इंटरनेशनल सेमिनार में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी कंपनी और व्यवहार के अकाउंट को सही रखना चाहिए। कौटिल्य का अर्थशास्त्र अवश्य पढ़ें, उसमें शासन और नैतिकता की बेहतरीन व्यवस्थाएं दी गई हैं। उन्होंने कौटिल्य का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने सरकारी और निजी कामों के लिए अलग दीपक जलाया था, ताकि जनता के धन का दुरुपयोग न हो।
“देशहित की सोच से ही राष्ट्र प्रगति करता है”
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में अच्छी सोच और व्यवहार का संस्कार डालना जरूरी है। राष्ट्रहित की भावना रखने से ही देश प्रगति करता है। यदि विद्यार्थी इसी सोच से आगे बढ़ेंगे तो वे अच्छे नागरिक, अकाउंटेंट और अधिकारी बनेंगे।
कुलगुरु के बयान से उठा था विवाद
12 सितम्बर 2025 को एक कार्यक्रम में प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा था कि इतिहास में महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और अकबर जैसे कई राजा हुए, जिनमें कुछ औरंगजेब जैसे कुशल प्रशासक भी थे। इस बयान के बाद छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया और कुलगुरु को कई घंटों तक चेंबर में रोक लिया था, बाद में पुलिस सुरक्षा में उन्हें निकाला गया। विवाद बढ़ने पर प्रो. मिश्रा ने माफी मांग ली, कहा कि उनका वक्तव्य गलत तरीके से पेश किया गया। वे अहिन्दी भाषी हैं, जिससे अभिव्यक्ति में भ्रम हुआ। उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था।
