चित्तौड़गढ़ में प्रसूता की मौत पर हंगामा, 4.25 लाख मुआवजे पर समझौता
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डॉक्टर बोले- महिला पहले से थी गंभीर, जांच के लिए टीम गठित
चित्तौड़गढ़, 24 अक्टूबर: चित्तौड़गढ़ के प्रतापनगर स्थित राजस्थान हॉस्पिटल में गुरुवार रात प्रसूता की मौत के बाद परिजनों और समाजजनों ने जमकर हंगामा किया। नवजात की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में नर्सिंग स्टाफ ने डिलीवरी कराई, जिससे प्रसूता की मौत हो गई। हंगामे के बाद पुलिस और प्रशासन ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों के बीच 4.25 लाख रुपए मुआवजे पर समझौता कराया।
डिलीवरी के 15 मिनट बाद ही हो गई मौत
गणेशपुरा निवासी नंदू देवी (30) पत्नी भरत पुरी को 21 अक्टूबर को सूजन की शिकायत पर राजस्थान हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 22 अक्टूबर को डॉक्टर ने उसे डिस्चार्ज कर दिया, लेकिन उसी रात उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई। गुरुवार को ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ जाने के बावजूद डिलीवरी कराई गई, जिसके करीब 15 मिनट बाद ही नंदू की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि उस समय डॉक्टर मौजूद नहीं थे और केवल नर्सिंग स्टाफ ने केस संभाला, जो नाकाम रहे।
तनावपूर्ण माहौल, पुलिस और प्रशासन पहुंचे
महिला की मौत की खबर फैलते ही समाज के लोग हॉस्पिटल के बाहर एकत्र हो गए और नारेबाजी करने लगे। परिजन डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग करने लगे। सूचना पर डिप्टी एसपी विनय चौधरी, तहसीलदार राहुल धाकड़ और सीआई निरंजन प्रताप मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद माहौल शांत कराया।
डॉक्टर ने लापरवाही के आरोपों को बताया गलत
डॉ. कालिम हुसैन ने कहा कि नंदू देवी को पहले से ही ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या थी। उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी गई थी, लेकिन देरी के कारण स्थिति बिगड़ गई। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
CMHO ने गठित की जांच टीम
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ताराचंद गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय मेडिकल टीम बनाई गई है। टीम ने हॉस्पिटल से सभी रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं और अब ओपन रिकॉर्ड्स की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद तय होगा कि लापरवाही किसकी थी।
