बांसवाड़ा बनेगा राजस्थान में ‘सोने का गढ़’
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खाकरिया का गढ़ा में तीसरे स्वर्ण भंडार की पुष्टि, 1.20 टन सोना मिलने के संकेत
उदयपुर, 27 अक्टूबर: मां त्रिपुरा सुंदरी, माही बांध और मानगढ़ धाम की पावन धरा बांसवाड़ा अब ‘सोने के गढ़’ के रूप में उभर रही है। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने घाटोल ब्लॉक के खाकरिया का गढ़ा गांव में तीसरे स्वर्ण भंडार की पुष्टि की है। लगभग तीन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 1.20 टन स्वर्ण अयस्क मिलने के संकेत हैं।
खान सचिव टी. रविकांत ने बताया कि घाटोल ब्लॉक के भुकिया और जगपुरा-देलवाड़ा में पहले ही दो भंडारों की पुष्टि हो चुकी है। तीसरा ब्लॉक मिलने से बांसवाड़ा ‘गोल्ड बेल्ट’ के रूप में विकसित हो रहा है। छह वर्ष पूर्व हुए सर्वे में 600–700 फीट गहराई से लिए गए नमूनों में सोने की उपस्थिति मिली थी।
3 नवंबर को इस परियोजना की निविदाएं खोली जाएंगी। सर्वेक्षण और खनन लाइसेंस के लिए हीराकुंड नेचुरल रिसोर्सेज (अहमदाबाद), पोद्दार डायमंड (मुंबई), ओवैस मेटल एंड मिनरल्स (रतलाम), हिंदुस्तान जिंक (उदयपुर) और जेके सीमेंट (कानपुर) सहित पांच कंपनियां प्रतिस्पर्धा में हैं।
लगभग 2.59 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चार गांव — कांकरिया गढ़ा, डूंगरिया पाड़ा, देलवाड़ा रावणा और देलवाडा लोकिया शामिल हैं। जीएसआई के अनुसार, यह सर्वेक्षण दो से तीन वर्षों में पूरा होगा।
खनन शुरू होने के बाद राजस्थान की देश के कुल स्वर्ण उत्पादन में हिस्सेदारी 25% से अधिक हो सकती है। फिलहाल सोने का उत्पादन केवल कर्नाटक के हुट्टी और कोलार गोल्ड फील्ड में होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि खनन से इलेक्ट्रॉनिक, पेट्रोकेमिकल, बैटरी, सिक्का निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
