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सरपंच और VDO ने किया 11 लाख रुपए का गबन

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सरपंच और VDO ने किया 11 लाख रुपए का गबन

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बिना काम करवाए उठाए पैसे, जांच में दोनों दोषी साबित
अभयपुर ग्राम पंचायत का मामला, पंचायत समिति ने दर्ज करवाई एफआईआर; आंशिक रिकवरी, बाकी राशि वसूली की प्रक्रिया जारी

चित्तौड़गढ़, 29 अक्टूबर (विजन 360 न्यूज डेस्क):
चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति क्षेत्र की अभयपुर ग्राम पंचायत में सरकारी योजनाओं के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां विकास कार्यों के नाम पर करीब 11 लाख रुपए सरकारी खाते से निकाल लिए गए, जबकि जमीन पर कोई काम हुआ ही नहीं। जांच में तत्कालीन सरपंच रघुवीर सिंह और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) ओमप्रकाश कुमावत को दोषी पाया गया है। पंचायत समिति विकास अधिकारी समुद्र सिंह ने दोनों के खिलाफ विजयपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है।
शिकायत पर बनी जांच कमेटी
ग्राम पंचायत में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद 18 नवंबर 2024 को पंचायत समिति कार्यालय में चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई। इसमें लेखाधिकारी, सहायक लेखाधिकारी, अतिरिक्त विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी शामिल थे। कमेटी ने सभी रिकॉर्ड, माप पुस्तिका और वाउचर की जांच की। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि कार्य शुरू ही नहीं किए गए, फिर भी भुगतान कर दिया गया था।
मौके पर जांच में नहीं मिला कोई काम
कमेटी ने मौके पर निरीक्षण किया, जहां कोई निर्माण कार्य या मटेरियल नहीं मिला। रिपोर्ट 6 दिसंबर 2024 को तैयार की गई, जिसमें लिखा गया कि सरपंच और वीडियो ने राजकीय राशि का दुरुपयोग किया है। दोनों के खिलाफ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 की धाराओं 207, 208 और 209 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई।
वसूली नोटिस और सुनवाई प्रक्रिया
28 जनवरी 2025 को दोनों को वसूली नोटिस जारी किए गए। 15 अक्टूबर को सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन पूर्व सरपंच रघुवीर सिंह अनुपस्थित रहे। वहीं, रिटायर्ड वीडियो ओमप्रकाश कुमावत ने कहा कि मटेरियल पंचायत में लाया गया था, इसलिए भुगतान किया गया, पर बाद में काम नहीं हुआ। कमेटी ने उनके तर्क को अस्वीकार करते हुए इसे गंभीर अनियमितता बताया।
आंशिक रिकवरी, बाकी राशि लंबित
जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत में 38 कार्य स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 17-18 काम बाद में कराए गए। लगभग 11 लाख में से कुछ राशि की रिकवरी हो चुकी है, शेष राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया है।
पुलिस और प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुटे
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग अनुसंधान कर रहा है। विकास अधिकारी ने बताया कि पूरी रिपोर्ट जिला परिषद के CEO और कलेक्टर को भेज दी गई है। जरूरत पड़ने पर पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 के तहत सरपंच को पद से हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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