प्रेम-पाती नहीं, अब डाकिए देते हैं नोटिस
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अंतरदेशीय पत्र-पोस्टकार्ड की बिक्री में 95% की गिरावट
उदयपुर, 31 अक्टूबर (राजेश वर्मा): एक समय था जब प्रेम-पाती के लिए घर के बाहर गली-मोहल्ले में सुबह-शाम डाकिए के आने का बेसब्री से इंतज़ार रहता था। लेकिन बदलते दौर ने इस भावना को इतिहास बना दिया है। मोबाइल क्रांति और अत्याधुनिक स्मार्टफोन के बढ़ते चलन ने प्रियजन से अपनत्व जताने वाले पत्र लिखने की रुचि को पूरी तरह खत्म कर दिया है। नतीजतन, डाकघरों में अंतरदेशीय पत्र और पोस्टकार्ड की बिक्री में अभूतपूर्व गिरावट आई है, जो 95 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
इस बदलाव ने डाकिए के काम का स्वरूप ही बदल दिया है। कभी हजारों चिट्ठियाँ पहुँचाने वाले डाकियों के हाथ अब मुख्य रूप से कानूनी या विभागीय नोटिस, पत्र-पत्रिकाएं और कुछ पार्सल वितरण तक सीमित रह गए हैं।
मुख्य डाकघर के सहायक उपाधीक्षक अक्षय भाणुदास ने भी वितरण कार्य और बिक्री घटने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पहले पानी-बिजली के बिल और बीमा किश्त जैसी सूचनाएं डाक से आती थीं, लेकिन अब ये सब ई-मेल और एसएमएस के जरिए तुरंत पहुँच जाती हैं। डाककर्मियों के अनुसार, अंतरदेशीय पत्र और पोस्टकार्ड का उपयोग अब मुख्यतः वकील और कंपनियाँ नोटिस देने के लिए करती हैं, और पोस्टकार्ड का उपयोग भी रजिस्टर्ड एडी पावती पाने तक सीमित हो गया है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो, एक समय शहर में प्रतिदिन 55-60 हजार डाक वितरित होती थी, जो अब छह लाख से अधिक आबादी वाले इस शहर में घटकर मात्र 15-16 हजार रह गई है।
वितरण बीट बढ़े, डाकिए घटे
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ काम कम हुआ है, वहीं डाक वितरण व्यवस्था को संभालने वाले डाकियों की संख्या भी कम हुई है। उदयपुर जोन (उदयपुर और राजसमंद जिले) में डाक वितरण के लिए 130 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल करीब 80 डाकिए ही कार्यरत हैं। विभाग में वर्ष 1982 के बाद से नए पद स्वीकृत नहीं हुए हैं। काम कम होने के बावजूद, शहर के विस्तार के कारण वितरण बीट 60-65 से बढ़कर 82 हो गई हैं, और वितरण केंद्र एक से बढ़कर चार स्थापित किए गए हैं, ताकि बचे हुए औपचारिक वितरण कार्य को संभाला जा सके। डाकिए का इंतज़ार अब केवल औपचारिकताओं के लिए ही शेष रह गया है।
