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अब अपराधियों तक जल्द पहुंचना होगा आसान, एफएसएल साक्ष्य अब तुरंत हो सकेंगे उपलब्ध

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अब अपराधियों तक जल्द पहुंचना होगा आसान, एफएसएल साक्ष्य अब तुरंत हो सकेंगे उपलब्ध

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उदयपुर में राजस्थान की पहली मोबाइल फोरेंसिक लैब लॉन्च, प्रदेश को मिली 56 मोबाइल लैब
उदयपुर, 6 नवम्बर:
फोरेंसिक साइंस लैब राजस्थान के निदेशक डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से राजस्थान को 56 मोबाइल फोरेंसिक लैब मिली हैं। अब इन अत्याधिनुक तकनीकी से लैस मोबाइल फोरेंसिक लैब की मदद से अपराधियों तक जल्द पहुंचने में मदद मिलेगी। एफएसएल साक्ष्य अब तुलनात्मक रूप से जल्द उपलब्ध हो सकेंगे, जो अपराधियों को जल्द सजा दिलाने में सहायक बनेंगे।
उन्होंने गुरुवार को यहां पुलिस लाइन स्थित कांफ्रेंस हॉल में पत्रकारों को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से देश में राजस्थान को सर्वाधिक 56 मोबाइल फोरेंसिक लैब मिली हैं। उदयपुर में राजस्थान की पहली मोबाइल फोरेंसिक लैब लॉन्च करने के साथ ही संभाग के सभी पांचों जिलों के लिए एक-एक मोबाइल लैब लांच की गई है। लैब के लिए पूरा मैनपॉवर भी दिया गया है। भविष्य में प्रत्येक जिले को दो-दो मोबाइल फोरेंसिक लैब आवंटन करने की योजना है। मोबाइल फोरेंसिक लैब आपराधिक घटनाओं व हादसों के वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए 14 तरह के अत्याधुनिक किट हैं, जो किसी भी अपराध व घटना के प्रारंभिक जांच परिणाम जुटाने में मददगार होंगे।
डॉ शर्मा ने बताया कि नवीन कानून में मोबाइल लैब को इंट्रोड्यूज किया गया है। कानून में सात साल या इससे अधिक सजा वाली आपराधिक घटनाओं की जांच में एफएसएल अनिवार्य किया गया है। ऐसे में अब अपराधी अपराध करने के बाद सजा से बच नहीं सकेंगे। ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर अपराधी को जल्द सजा दिलाई जा सकेगी। उन्होंने बताया कि अब घटना की सूचना मिलते ही मोबाइल फोरेंसिक लैब चंद मिनटों में मौके पर पहुंच बेहतर साक्ष्य जुटा सकेगी। मोबाइल लैब पर 360 डिग्री का कैमरा लगे होने के साथ ही माइक्रोस्कोप भी लगा है। पहले घटना की सूचना मिलने पर मौके पर सभी उपकरण लेकर तत्काल पहुंचना मुश्किल होता था, अब वह समस्या नहीं रहेगी। घटना स्थल पर ही प्रारंभिक जांच परिणाम बताए जा सकेंगे। जैसे, हाल ही जैसलमेर में बस में आग लगने का कारण सिलेंडर विस्फोट माना जा रहा था, लेकिन फोरेंसिक जांच में अमोनिया गैस से आग लगना स्पष्ट हुआ।
उदयपुर रेंज के आईजी गौरव सक्सेना ने बताया कि मोबाइल फोरेंसिक लैब लॉन्च करने से पहले संभाग के सभी जिला पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डिप्टी एवं निरीक्षक स्तरीय पुलिस अधिकारियों को इसकी तकनीक और उपकरणों की कार्यशैली के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मोबाइल लैब में लगे अत्याधुनिक तकनीकी किट की कार्यशैली भी समझी।
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