रेलमगरा सहकारी समिति में गबन के दोषी को तीन साल की सजा, 60 हजार जुर्माना
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उदयपुर, 7 नवंबर (विजन 360 न्यूज डेस्क): रेलमगरा ग्राम सेवा सहकारी समिति में हुए गबन प्रकरण में एसीबी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन व्यवस्थापक माधवलाल पुत्र अमरचन्द्र जाट (58) निवासी सादड़ी तहसील रेलमगरा राजसमंद को भ्रष्टाचार, आपराधिक न्यास भंग और कूटरचना के अपराधों में दोषी ठहराया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक राकेश मित्तल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि माधवलाल जाट पर वर्ष 2002 में रेलमगरा सहकारी समिति के धन का गबन करने का आरोप था। जांच में पाया गया कि उसने 17 से 22 जनवरी 2002 के बीच समिति सदस्यों से 1,21,845 रुपए की राशि वसूल की, लेकिन रोकड़ बही में केवल 80,845 रुपए ही दर्ज किए। इस प्रकार उसने 41,000 रुपए का गबन किया और खातों में कूटरचना कर दस्तावेज़ों में हेरफेर की। विशिष्ट लोक अभियोजक राकेश मित्तल ने न्यायालय में 21 गवाहों और 108 दस्तावेज़ों के साथ अभियोजन पक्ष को प्रमाणित किया। अदालत ने पाया कि आरोपी ने जानबूझकर रसीदों में काट-छांट कर राशि का दुरुपयोग किया। एसीबी कोर्ट-2 की विशिष्ट न्यायाधीश संदीप कौर ने अभियुक्त को तीन साल के साधारण कारावास और 60 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
