नगर परिषद प्रतापगढ़ में करोड़ों की जमीनों का सौदा कौड़ियों के भाव
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खांचा भूमि बताकर आवासीय पट्टे जारी, पार्षद और परिजन बने खरीदार व गवाह; कोर्ट की यथास्थिति बनाए रखने की हिदायत
प्रतापगढ़, 10 नवम्बर(विजन 360 न्यूज डेस्क): प्रतापगढ़ नगर परिषद में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीनों के अवैध सौदे का मामला सामने आया है। आरजी-802 बगवास रोड क्षेत्र की व्यावसायिक भूमि को खांचा भूमि बताकर आवासीय पट्टे जारी किए गए, जिससे नगर परिषद को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। मामले में पार्षद, उनके परिजन और परिषद अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार वार्ड 23 के भाजपा पार्षद खुर्शीद मंसूरी ने 10 दिसंबर 2024 को साधारण सभा की बैठक में अपने और भाई इमरान मंसूरी के नाम से कुल 1800 वर्गफीट भूमि के दो पट्टे जारी करवाए। यह प्रस्ताव सभापति रामकन्या गुर्जर की उपस्थिति में पारित हुआ। रजिस्ट्री के दौरान खरीदार और गवाह एक ही व्यक्ति रहे। इमरान मंसूरी ने स्वयं खरीदार और गवाह दोनों की भूमिका निभाई। परिषद ने बिना उचित प्रक्रिया और नीलामी के ही रजिस्ट्री पूरी कर दी।
आरजी-802 क्षेत्र की भूमि को पहले व्यावसायिक दर्ज किया गया था, किंतु नगर परिषद ने मनमाने तरीके से भू-उपयोग परिवर्तन कर उसे आवासीय श्रेणी में दिखा दिया। इस भूमि पर पहले उच्च न्यायालय जोधपुर में रिट पिटिशन संख्या 10550/2024 व 13787/2025 लंबित हैं, जिनमें स्टे ऑर्डर प्रभावी है। इसके बावजूद परिषद ने नीलामी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया।
पहले नीलामी प्रक्रिया, फिर गुपचुप भूखंड का आवंटन
नीलामी प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। 10 जून 2025 को हुई नीलामी में तेजस शाह ने ₹16,250 प्रति वर्गफीट की सर्वोच्च बोली लगाई थी, लेकिन परिषद ने यह नीलामी निरस्त कर दी। बाद में गुपचुप तरीके से एक ही व्यक्ति को ₹9,500 प्रति वर्गफीट दर पर 2,550 वर्गफीट भूखंड आवंटित कर दिया गया।
हाईकोर्ट का स्टे, फिर भी जारी भूखंड पर निर्माण
वहीं, पार्षद खुर्शीद मंसूरी के नाम जारी किए गए आवासीय पट्टों को लेकर शिकायतकर्ता चंद्रशेखर सुथार ने आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें न्यायालयी दस्तावेज, खसरा नकल और परिषद की बैठक की प्रतियां प्रस्तुत की गईं। जानकारों का कहना है कि नगर परिषद ने न केवल कोर्ट के आदेशों की अनदेखी की है, बल्कि भू-उपयोग परिवर्तन और नीलामी के नियमों का भी उल्लंघन किया है। वर्तमान में उक्त भूखंड पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि हाई कोर्ट ने भूमि को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हुए हैं।
