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देशभर में मनरेगा कर्मियों का अटका भुगतान, दीवाली भी रही काली

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देशभर में मनरेगा कर्मियों का अटका भुगतान, दीवाली भी रही काली

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केंद्र ने बनाया नया पोर्टल एनएसए, तकनीकी खामियों से नहीं हो पा रहा मानदेय जारी
राजेश वर्मा
उदयपुर, 10 नवम्बर (पंजाब केसरी)
: देशभर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कार्यरत करोड़ों कार्मिकों और श्रमिकों का अगस्त माह से मानदेय भुगतान लंबित है। केंद्र सरकार द्वारा नया एनएसए (National System for Accounting) पोर्टल लागू किए जाने के बाद से भुगतान व्यवस्था पूरी तरह से बाधित हो गई है। परिणामस्वरूप, ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों और श्रमिकों की दीवाली खाली हाथ बीती।
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराना है, परंतु अप्रैल 2025 से ही इस योजना से जुड़े कर्मचारियों को भुगतान में लगातार देरी हो रही है। जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जुलाई तक केवल तीन करोड़ रुपये की राशि ही जारी हुई थी, जिससे जुलाई तक के भुगतान निपटाए गए। इसके बाद अगस्त से अब तक का मानदेय नहीं मिल पाया है। बिना भुगतान के कर्मियों और श्रमिकों के सामने आजीविका चलाना कठिन हो गया है।
गलत वितरण से अटका करोड़ों का भुगतान
सूत्रों के अनुसार पूर्व में भुगतान के दौरान राशि वितरण में गंभीर गड़बड़ी हुई। जहां जिसे दो करोड़ रुपये मिलने थे, उसे दस करोड़ दे दिए गए, जबकि जिन्हें दस करोड़ मिलना था, उन्हें मात्र दो करोड़ ही दिए गए। अब सरकार के लिए अधिक दी गई राशि की वसूली चुनौती बन गई है। जब तक यह वसूली पूरी नहीं होती, नए भुगतान रुके रहने की संभावना है।
उदयपुर में भी करोड़ों की राशि लंबित
अकेले उदयपुर जिले में पंचायती राज विभाग के अधीन मनरेगा में संविदा कर्मियों—कोऑर्डिनेटर, मैनेजर, ऑपरेटर, लेखा सहायक, तकनीकी सहायक और चपरासी—का साढ़े चार करोड़ रुपये का भुगतान अगस्त से लंबित है। वहीं दो लाख से अधिक मनरेगा श्रमिकों के लगभग 45 करोड़ रुपये भी बकाया हैं। हाल ही में विभाग को केवल 50 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं, जो भी ट्रांसफर प्रक्रिया में अटके हुए हैं।
“प्रस्ताव दिल्ली भेजा, पेंडिंग है”
अधिशासी अभियंता नरेगा बुद्धि प्रकाश खोईवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने नया एनएसए पोर्टल लागू किया है, जिससे देशभर में भुगतान प्रभावित हुआ है। “अब सभी राज्यों को क्रमवार भुगतान किया जा रहा है। राजस्थान का प्रस्ताव दिल्ली भेजा जा चुका है, जो फिलहाल लंबित है। उदयपुर से साढ़े चार करोड़ रुपये की मांग भेजी गई थी, जिसके बदले अभी तक 40 लाख रुपये ही मिले हैं।”

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