भारत ने तय समय से पहले हासिल किए अपने जलवायु लक्ष्य, ‘ग्रीन’ नहीं ‘हरित’ सिद्धांत की वकालत
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COP-30 सम्मेलन: अमेज़न में जलवायु शांति का वैश्विक संदेश
अमेज़न में 30वां COP सम्मेलन: पृथ्वी के फेफड़ों में वैश्विक बैठक
डॉ. अनिल मेहता
संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क फॉर क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के अंतर्गत होने वाला 30वां कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP-30) इस वर्ष 10 से 21 नवंबर 2025 तक ब्राजील के बेलम शहर में आयोजित हो रहा है। यह वही शहर है जो अमेज़न नदी के विशाल मुहाने पर स्थित है और जिसे “पृथ्वी का फेफड़ा” कहा जाता है।
अमेज़न वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और बड़ी मात्रा में कार्बन संचित कर पृथ्वी को संतुलित रखता है। लेकिन चिंताजनक तथ्य यह है कि इसके करीब 20 से 30 प्रतिशत हिस्से में वन क्षरण हो चुका है, जो विश्व जलवायु के लिए गंभीर चेतावनी है।
पेरिस समझौते की दशक वर्षगांठ और एनडीसी की तीसरी समीक्षा
यह COP-30 सम्मेलन पेरिस समझौते (COP-21, 2015) की दशक वर्षगांठ भी है।
2015 में देशों ने मिलकर वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का संकल्प लिया था। इसके लिए सभी राष्ट्रों को अपने एनडीसी (नेशनली डेटरमिंड कॉन्ट्रिब्यूशन्स) तैयार करने होते हैं, जिनमें उत्सर्जन कटौती और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की रणनीति शामिल होती है।
इन एनडीसी की समीक्षा हर पांच वर्ष में की जाती है, और इस बार देश अपना तीसरा संस्करण प्रस्तुत कर रहे हैं।
भारत: निर्धारित समय से पहले हासिल किए जलवायु लक्ष्य
भारत COP-30 में ऐसी उपलब्धियों के साथ प्रवेश कर रहा है, जो वैश्विक मंच पर उसकी साख को और मजबूत करती हैं।
एनडीसी लक्ष्य समय से पहले हासिल: भारत ने अपने निर्धारित जलवायु लक्ष्य तय समय से पहले प्राप्त कर लिए हैं।
सौर ऊर्जा में 41 गुना वृद्धि: वर्ष 2014 में जहां भारत की सौर क्षमता 2.82 गीगावाट थी, वहीं जून 2025 तक यह बढ़कर 116.25 गीगावाट हो चुकी है।
उत्सर्जन तीव्रता में 36% कमी: 2005 से 2020 के बीच भारत ने उत्सर्जन तीव्रता में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।
गैर-परंपरागत ऊर्जा लक्ष्य समय से पहले पूरा: कुल विद्युत क्षमता का 50% हिस्सा गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य भी भारत ने 2030 से पाँच वर्ष पहले ही पूरा कर लिया है।
प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दुनिया में सबसे कम: भारत आज उन देशों में शामिल है, जिनका प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन बेहद कम है।
ग्रीन नहीं, ‘हरित’ सिद्धांत: भारतीय दृष्टिकोण से जलवायु शांति
लेख में बताया गया है कि जलवायु समाधान केवल पश्चिमी ग्रीन मॉडल पर आधारित नहीं होना चाहिए। इसके बजाय भारत का ‘हरित’ (HARIT) सिद्धांत — Holistic Actions for Revitalization of Indigenous Traditions— अधिक संतुलित और टिकाऊ दिशा प्रदान करता है।
विशेषता ‘ग्रीन’ सिद्धांत ‘हरित’ सिद्धांत
परिभाषा ऊर्जा और संसाधनों के विकल्प ढूंढ़ने का विचार देशज परंपराओं के पुनर्स्थापन का समग्र दृष्टिकोण
उपयोग उपभोग-केंद्रित सह-अस्तित्व, योग और संरक्षण आधारित
भाव “Greed” की छाया “हरि” अर्थात् सृजन और संतुलन
परिणाम भौतिक संपदा पर ध्यान जीवन-मूल्यों का संवर्धन
अर्थव्यवस्था केवल सर्कुलर इकोनॉमी सर्कुलर इकोलॉजी—पारिस्थितिक संतुलन आधारित विकास
जलवायु विमर्श में बड़े बदलाव की जरूरत
वित्त से ‘चित्त’ की ओर: जलवायु चर्चा केवल फंडिंग पर निर्भर न रहे, बल्कि मन, बुद्धि और चेतना में बदलाव पर केंद्रित हो।
एनडीसी का विस्तार: केवल ऊर्जा क्षेत्र पर ध्यान न देकर, इसमें उत्पादन पद्धतियों, उपभोग संस्कृति और जीवनशैली में परिवर्तन को शामिल किया जाए।
खाद्य अपशिष्ट में 50% कमी का लक्ष्य: 2030 तक खाद्य अपशिष्ट को आधा करने का लक्ष्य एनडीसी में शामिल होना चाहिए, क्योंकि हर वर्ष लगभग 1.05 अरब टन भोजन बर्बाद होता है, जो कुल वैश्विक उत्सर्जन का 8–10% योगदान देता है।
