8 साल से केबल ऑपरेटरों की करोड़ों की बकाया राशि नहीं वसूल पाया विद्युत निगम
Share
प्रतापगढ़ में ‘स्टे’के बहाने बच रहे ऑपरेटर, बेपरवाह निगम को दस्तावेज टटोलने की फुर्सत नहीं
प्रतापगढ़, 22 नवम्बर (विजन 360 न्यूज डेस्क) : राजस्थान के सभी जिलों में जहां विद्युत पोल उपयोग के एवज में केबल ऑपरेटर नियमित रूप से पोल किराया और डिमांड राशि जमा कर रहे हैं, वहीं प्रतापगढ़ जिला इस व्यवस्था से उलट तस्वीर पेश कर रहा है। यहां बीते 8 वर्षों से लगभग 10 केबल ऑपरेटरों से करोड़ों रुपए की बकाया राशि विद्युत निगम को प्राप्त नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार 2015 से 2023 तक केबल ऑपरेटरों को किराया और डिमांड राशि का भुगतान करने के लिए विद्युत निगम ने नोटिस जारी किए। इसके बावजूद जिले में सिर्फ छोटीसादड़ी उपखंड के ऑपरेटरों ने लगभग 7 लाख 37 हजार रुपए जमा कराए, जबकि अन्य 9 ऑपरेटरों ने आज तक एक भी रुपए का भुगतान नहीं किया। रिकॉर्ड में करोड़ों रुपए की बकाया राशि दर्ज है, लेकिन कार्रवाई को लेकर निगम लगातार चुप्पी साधे हुए बैठा है।
स्टे की कॉपी नहीं निगम के पास
-शहर के जेईएन प्रकाशचन्द्र खाटवा के अनुसार जैन सेटेलाइट ने डिमांड को लेकर कोर्ट में वाद दायर किया है, परन्तु एक वर्ष बीतने के बाद भी स्टे ऑर्डर अथवा कोर्ट संबंधी दस्तावेज निगम को उपलब्ध नहीं कराए गए। बाकी 9 ऑपरेटरों के मामले में भी निगम उन्हें “वाद का हिस्सा” मानकर कार्रवाई टालता ही आ रहा है, जबकि ये ऑपरेटर कोर्ट गए ही नहीं।
फाइबर लाइनों की पहचान न होने का अजीब दावा
निगम अधिकारी कई बार यह भी बयान दे रहे हैं कि सरकारी व प्राइवेट केबल की पहचान नहीं हो पा रही है। इस बयान पर भी अब सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रतापगढ़ शहर में अधिकांश फाइबर केबल बॉक्स पर संबंधित कंपनियों के नाम स्पष्ट लिखे हुए हैं। और तो और अब फाइबर केबल पर भी कम्पनियों के नाम प्रिंट होते हैं।
आरटीआई में भी गोलमाल, मुख्य अभियंता ने दिए थे निर्देश
सूचना के अधिकार के तहत बकाया राशि की जानकारी मांगी गई, मगर एक वर्ष तक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। द्वितीय अपील में मुख्य अभियंता आई.आर. मीणा ने अधीनस्थ अधिकारियों को तत्काल सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए, फिर भी आज तक जानकारी नहीं दी गई।
ये ऑपरेटर बताए गए बकायेदार
जैन सेटेलाइट, कम्प्यूटर वर्ल्ड, रिटा कम्प्यूटर, राज केबल नेटवर्क, रेडिनेट केबल, चेतक केबल, एयरटेल केबल, नफिसा केबल, एलबीएस संस्थान, तिरुपति ट्रेडर्स सहित कुल 10 ऑपरेटरों पर भारी बकाया राशि दर्ज है।
असल प्राथमिकता पर सवाल
जिले भर में जहां बड़े स्तर पर केबल ऑपरेटरों को छूट दी जा रही है, वहीं विद्युत निगम छोटे उपभोक्ताओं के हजार–पांच सौ रुपए के बकाया पर तुरंत कनेक्शन काटने में सक्रिय रहता है। इससे निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
